मां पूर्णागिरि मेले से यूपी रोडवेज की तो बल्ले-बल्ले हो रही है, लेकिन उत्तराखंड रोडवेज के पास बसों का भारी टोटा है। बसों की कमी और ट्रेनों का संचालन बंद होने से दर्शन को आ रहे मैदानी रूट के यात्रियों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बस की प्रतीक्षा में बैठे रहना यात्रियों की मजबूरी बनी हुई है। स्टेशन में बस के आते ही सीट घेरने के लिए यात्रियों में मारामारी मचना आम हो गया है।
पूर्णागिरि धाम के मेले में निजी वाहनों के अलावा यात्री रोडवेज और चार्टड बसों, पैदल, साइकिल और बाइकों से पहुंचते हैं। यात्री बढ़ने पर मेला अवधि में रेलवे भी पीलीभीत-टनकपुर के बीच मेला स्पेशल ट्रेनों का संचालन करता है। गत वर्ष तक मेले में ट्रेनों का संचालन जारी रहा, लेकिन बड़ी रेल लाइन निर्माण कार्य के चलते इस वर्ष ट्रेेनों का संचालन बंद होने से रोडवेज बसों में मेला यात्रियों का दबाव बढ़ गया है। रोजाना हजारों यात्री रोडवेज बसों से आ-जा रहे हैं। कमाई के इस वक्त में जहां यूपी परिवहन निगम ने बरेली, पीलीभीत से टनकपुर के लिए अतिरिक्त बसों का संचालन किया है, वहीं बसों के अभाव में उत्तराखंड रोडवेज को नुकसान उठाना पड़ रहा है।
स्टेशन प्रभारी संचालन योगेंद्र सिंह चंद के मुताबिक टनकपुर डिपो से बसों की संख्या बढ़ाई गई है, लेकिन यूपी की अपेक्षा यह काफी कम है। उन्होंने बताया कि मेला अवधि में मैदानी रूट पर 14 से बढ़ाकर 22 बसें चलाई जा रही है। यूपी रोडवेज की पहले 65 बसें टनकपुर आती थी, जो मेला अवधि में बढ़कर 110 हो गई है। बावजूद इसके यात्रियों में बस में बैठने को मारामारी मच रही है।
यूपी मुकाबला करना संभव नहीं : आरएम
बसों के संचालन में यूपी का मुकाबला करना संभव नहीं है, लेकिन टनकपुर डिपो से भी क्षमता अनुसार मैदानी रूट पर पर्याप्त बसों का संचालन किया जा रहा है। बरेली रूट पर बसों की संख्या 14 से बढ़ाकर 22 की गई है। इसके लिए अन्य रूटों पर बस संचालन में कटौती करनी पड़ी है। हरिद्वार, हल्द्वानी, गणाईगंगोली रूट की बसें हटाकर बरेली रूट पर संचालित की जा रही है। -पवन मेहरा, मंडलीय प्रबंधक रोडवेज, टनकपुर रीजन।