पाटी में दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए स्थापित दुग्ध अवशीतन केंद्र (चिलिंग प्लांट) को एकाएक बंद किए जाने से लोगों में भारी आक्रोश है। इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार दुग्ध उत्पादन रहा है।
यहां तीन हजार लीटर क्षमता के अवशीतन केंद्र के निर्माण के लिए पांच लाख रुपये लागत का भवन बनाया गया, जिसमें लाखों रुपयों की मशीनें लगी हैं। शुरूआती दौर में यहां 25 समितियों को शामिल किए जाने से 24 सौ लीटर दूध को ठंडा कर बड़े प्लांट में भेजा जाता था। इस बीच यहां की कई समितियों को चंपावत अवशीतन केंद्र से संबद्ध किए जाने के कारण यहां मात्र 187 लीटर दूध की ही आपूर्ति होने से दुग्ध संघ ने इसे बंद कर अवशीतन गृह को वीरान छोड़ दिया है। बिसारी स्थित प्लांट में कार्यरत डेयरी कर्मचारी नरेश पचौली का कहना है कि पहले सभी समितियों को प्लांट से जोड़ने से यहां की व्यवस्था ठीक ठाक चल रही थी। समितियों को अन्यत्र संबद्ध किए जाने का प्लांट के संचालन पर असर पड़ा है।
घाटे के चलते बंद किया प्लांट
दुग्ध संघ अध्यक्ष डा.अमर सिंह कोटियाल का कहना है कि पाटी में फिलहाल दूध का उपार्जन कम होने से दुग्ध संघ को 35 हजार रुपये प्रतिमाह का घाटा हो रहा है। क्षेत्र में दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए ही चिलिंग प्लांट की स्थापना की गई है। मार्च-अप्रैल में क्षेत्र में दूध का उत्पादन बढ़ने पर इस प्लांट को पुन: संचालित कर दिया जाएगा। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे परंपरागत गायों के स्थान पर जर्सी नस्ल की गायों का पालन करें, जो अधिक दूध देने के साथ उनके परिवार और दुग्ध संघ की आवश्यकता को पूरा कर सकें।