जिले के ढेरों ऐसे गांव हैं, जहां आजादी के 68 साल बाद भी बिजली का उजाला नहीं पहुंचा है। ऐसे लोगों के लिए रोजमर्रा की जिंदगी हो या दिवाली का पर्व अंधेरा, उनकी नियति बन चुका है। चंपावत जिले में ही 437 तोकों की 15 हजार से अधिक आबादी अंधेरे में रात काटती है। अब ऐसे लोगों के लिए उम्मीद की एक किरण सामने आई है। दो छात्रों ने बिजली उत्पादन का वैकल्पिक स्वरूप प्रदान किया है, जिससे सीमित रूप से अंधेरे से निजात मिल सकेगी। उन्होंने अपने इस मॉडल को यहां जिला स्तरीय विज्ञान महोत्सव में प्रदर्शित किया।
राजकीय इंटर कॉलेज लोहाघाट के इंटर के छात्र सौरभ भारती और मनोज कुमार ने बिना किसी बिजली की लाइन अथवा पेट्रो पदार्थ से घरों को रोशन करने का मॉडल पेश किया है। इसमें डायनमो लगे एक बोर्ड को चर्खी से जोड़ने पर बल्ब रोशन होने लगता है। चर्खी घुमाते ही डायनमो के जरिए बिजली जगमगाएगी।
दोनों छात्रों का कहना है कि हाथ से करीब एक घंटे चर्खी को घुमाने पर डेढ़ घंटे तक 60 एलईडी बल्ब जगमगा सकते हैं। इस बिजली को इसी उपकरण में लगी बैट्री में भी स्टोर किया जा सकेगा, जिसका उपयोग अन्य वक्त में भी किया जा सकेगा। साथ ही इस सिस्टम से मोबाइल भी चार्ज हो सकेगा। बाल वैज्ञानिक सौरभ और मनोज ने इस मॉडल को संसाधन प्रबंधन श्रेणी के तहत बृहस्पतिवार को यहां पेश किया। उनका कहना है कि इस प्रयोग में मात्र 300 रुपये की लागत आई है। छात्रों के मार्गदर्शक शिक्षक श्याम दत्त चौबे का कहना है कि इसका उपयोग बिजली रहित इलाकों में सीमित मात्रा में किया जा सकेगा। उनके इस मॉडल को मुख्य शिक्षाधिकारी एनसी पाठक सहित तमाम जानकारों ने सराहा है।
महोत्सव से निखर रही वैज्ञानिक प्रतिभाएं
जिला स्तरीय विज्ञान महोत्सव शुरू हो गया। यहां जीआईसी परिसर में आयोजित महोत्सव का उद्घाटन मुख्य अतिथि मुख्य शिक्षाधिकारी (सीईओ) एनसी पाठक और डीईओ माध्यमिक दलेर सिंह ने किया। कहा कि ऐसे महोत्सव वैज्ञानिक प्रतिभाओं को निखरने का मंच देते हैं। प्रधानाचार्य सीपी गहतोड़ी के संयोजन में हुए महोत्सव में विज्ञान प्रदर्शनी, मेला और विज्ञान ड्रामा पर कार्यक्रम हुए। विज्ञान प्रदर्शनी में समावेशी विकास के लिए विज्ञान और गणित, विज्ञान मेले का मुख्य विषय विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं अभियांत्रिकी, विज्ञान ड्रामा में विज्ञान और समाज विषय पर बाल वैज्ञानिकों ने मॉडल पेश किए। शिक्षक घनश्याम पांडेय के संचालन में हुए महोत्सव में जिला समन्वयक उमेद बिष्ट, भुवन शंकर पांडेय, नरेश राय, मदन राम, कीर्ति बल्लभ सक्टा, श्याम दत्त चौबे, जगदीश जोशी, भवान सिंह, बीना चौधरी, अशोक खर्कवाल आदि ने सहयोग किया। जिला स्तरीय विज्ञान महोत्सव में चारों विकासखंडों के विजेता स्कूलों ने हिस्सा लिया।