राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए चयनित लोहाघाट के शिक्षक नरेश चंद्र राय।
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राजकीय इंटर कॉलेज (जीआईसी) जानकीधार के अंग्रेजी प्रवक्ता शिक्षक नरेश चंद्र राय राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए चयनित हुए हैं। उन्हें यह पुरस्कार पांच सितंबर को शिक्षक दिवस पर दिल्ली मेें राष्ट्रपति द्वारा दिया जाएगा। पुरस्कार राशि, प्रशस्ति पत्र के अलावा दो वर्ष का सेवा विस्तार भी मिलेगा। शिक्षा को जुनून मानने वाले श्री राय ने केंद्रीय सचिवालय में अनुवादक की नौकरी छोड़ 1995 में शिक्षण कार्य में कदम रखा था।
करीब दो दशक पूर्व उन्होंने दुर्गम श्रेणी के राजकीय इंटर कॉलेज रेगड़ूू में सेवा दी। जीआईसी बापरू में सर्वाधिक सेवाकाल के दौरान उन्होंने शिक्षा के महत्व को जन-जन तक पहुंचाने के लिए राष्ट्रीय साक्षरता मिशन में भी संदर्भ व्यक्ति के रूप में योगदान दिया। विद्यालयी शिक्षा में छात्रों द्वारा निर्धारित समय में प्रश्रपत्र को सुंदर लेख में पूरा हल करने के लिए टाइम एंड स्पीड मैनेजमेंट विद गुड एंड राइटिंग नामक नवाचारी प्रयोग भी किया है। इससे छात्र-छात्राओं के लेखन में सुधार हुआ। अंग्रेजी भाषा के प्रति छात्र-छात्राओं की झिझक को दूर करने के लिए भी उन्होंने स्कूल में अंग्रेजी बोलने को बढ़ावा दिया। स्थानीय भाषा और बोली को अंग्रेजी भाषा से जोड़कर भाव स्पष्ट करने की विधा से इस भाषा को सीखने में मदद दिलाई। इस सम्मान का श्रेय वे प्रधानाचार्य रहे स्वर्गीय पिता भवानीदत्त राय, छात्र-छात्राओं, साथी शिक्षकों, विभागीय अधिकारी कर्मियों के अलावा श्रीराम सेवा समिति और कुमाऊं लोक सांस्कृतिक कला दर्पण को देते हैं।
दिव्यांग आधारित लघु फिल्म ज्योति में अभिनय भी किया
सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी शिक्षक राय का योगदान रहा। शिक्षण के अलावा वह सांस्कृतिक मंचों से भी जुडे हुए हैं। सांस्कृतिक मंचों में शैक्षिक गतिविधियों का संचालन कर सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ाने के लिए विभिन्न मंचों पर सरकारी स्कूलों में दी जाने वाली सुविधाओं की जानकारी दी जाती है। बाल अधिकार पर उन्होंने लघु फिल्म प्लीज कम इन का संपादन निर्देशन एवं पटकथा लेखन का कार्य किया। दिव्यांग बालिका आधारित लघु फिल्म ज्योति में अभिनय एवं संयोजन का कार्य किया। शिक्षक राय ने निर्वाचन की प्रक्रिया को निष्पक्ष तथा सरलता से कराने के लिए निर्वाचन नामक लघु फिल्म का निर्देशन, पटकथा लेखन और संपादन भी किया है। विभिन्न मेले, महोत्सवों आदि के सांस्कृतिक मंचों से उन्होंने विभिन्न सामाजिक बुराइयों और युवाओं में पनप रही नशापान की प्रवृत्ति के खिलाफ जन-जागरुकता अभियान चलाया।