चंपावत। नेपाल सीमा से लगे होने से टीजे (टनकपुर-जौलजीबी) मार्ग का सामरिक महत्व है। नेपाल से तल्ख होते संबंधों के बीच इसका महत्व और ज्यादा है, लेकिन इस सड़क का पूरा होना तो दूर, जिस पुल को जून 2019 में पूरा हो जाना था, वह पुल शुरू भी नहीं हो सका है और अब पुल के ठेकेदार के अनुबंध को भी निरस्त कर दिया गया है, लेकिन पुल का काम फिर से शुरू कराने के लिए नई निविदा प्रक्रिया भी शुरू नहीं की गई है।
टीजे रोड पर चूका और रुपालीगाड़ के बीच लधिया नदी पर 690 मीटर लंबे पुल का काम 2018 से शुरू किया गया। ब्रिज, रोपवे, टनल एंड अदर इन्फ्रांस्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (ब्रिडकुल) को 33 करोड़ रुपये की लागत वाले इस पुल को बनाने की जिम्मेदारी दी गई थी। छिटपुट सर्वे के अलावा पुल को लेकर कोई काम नहीं हुआ, जबकि इस पुल को जून 2019 में पूरा हो जाना था। काम में लापरवाही और अनुबंध की शर्त के उल्लंघन पर ठेकेदार का अनुबंध निरस्त कर दिया गया।
कोट
काम में लापरवाही के चलते ठेकेदार का अनुबंध समाप्त कर दिया गया। पूरे मामले में आगे के निर्देश के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। जैसे निर्देश आएंगे, उसके अनुरूप काम किया जाएगा। - गंभीर सिंह, सहायक महाप्रबंधक, ब्रिडकुल, हल्द्वानी।
पुल के बगैर सड़क का लाभ नहीं : विधायक
टीजे सड़क का चूका से आगे लाभ तभी मिल सकेगा, जब यह पुल पूरा हो सकेगा। पुल के बगैर टनकपुर से चूका तक ही आवाजाही हो सकेगी। ब्रिडकुल के मुताबिक पुल के निर्माण में न्यूनतम डेढ़ साल लगेंगे। इस रोड को लेकर आवाज उठाते रहे लोहाघाट के विधायक पूरन सिंह फर्त्याल का भी कहना है कि चूका और रुपालीगाड़ को जोड़ने वाले पुल को बनाने में देरी हुई है। पुल के बगैर आगे की रोड का कोई मतलब नहीं है।
तो आसान होती एसएसबी की बीओपी तक पहुंच
भारत-नेपाल सीमा पर स्थित एसएसबी की बॉर्डर आउटपोस्ट (बीओपी) तक पहुंच को सुगम बनाने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 2015 में 135 किमी टीजे मार्ग को मंजूरी दी थी, लेकिन प्रस्तावित पंचेश्वर बांध के डूब क्षेत्र की अंतिम स्थिति साफ न होने से जौलजीबी के बजाय ठुलीगाड़ से रुपालीगाड़ (42.275 किमी) तक ही मंजूर किया गया। चूका से रुपालीगाड़ तक के 24.40 किमी मार्ग पर विवाद के चलते अगस्त 2017 से पूरे 38 माह तक काम भी रुका रहा। अलबत्ता अब यह अड़चन दूर हो गई है। सड़क बनने से बीओपी तक मजबूत आधारभूत ढांचा बनने के साथ नेपाल सीमा पर सुरक्षा चौकसी सुगम होती। चंपावत और पिथौरागढ़ जिले की सीमा पर एसएसबी की 34 बीओपी में से 19 में सड़क सुविधा नहीं है। इस वजह से यहां जरूरी सामग्री पहुंचाने में देरी के साथ लागत भी ज्यादा आती है।