चंपावत के बनलेख में खराब पड़ा पहला हैंडपंप।
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जिला मुख्यालय से दस किमी दूर बनलेख और चंतोला में इन दिनों पानी की किल्लत है। क्षेत्र में लगे तीनों हैंडपंप शोपीस बने हुए हैं। ग्रामीण पानी के लिए भटकने को मजबूर हो रहे हैं। मकान बनाने के लिए भी मजदूर लगाकर पानी भरवाना पड़ रहा है।
गर्मी शुरू होते ही ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की किल्लत शुरू हो गई है। ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए पांच किमी दूर की दौड़ लगानी पड़ रही है। धारे-नौले में भीड़ अधिक होने से घंटों के बाद पानी मिल रहा है। बनलेख में लगे दो हैंडपंप लंबे समय से ठीक नहीं होने से चारों ओर झाड़ियों से बंद हो चुके हैं। वहीं चंतोला में लगा हैंडपंप भी शोपीस बना हुआ है।
चंतोला और बनलेख के लिए बनी पेयजल लाइन भी बारहमासी सड़क निर्माण के चलते टूट चुकी है। ग्रामीणों को मवेशियों के लिए पानी गधेरे से ढोना पड़ रहा है। आरके वर्मा, एई जल संस्थान चंपावत ने बताया कि खराब पड़े हैंडपंप को वर्तमान में ठीक किया जा रहा है। बनलेख में हैंडपंप खराब होने की जानकारी मेरे संज्ञान में नहीं है। जल्द टीम को भेजकर हैंडपंपों को ठीक करा दिया जाएगा।
बनलेख में लगे हैंडपंप लंबे समय से खराब पड़े है। हैंडपंप का प्रयोग नहीं होने से वे झाड़ियों से ढंक चुके हैं। पीने के पानी के लिए चार किमी दूर जाना पड़ रहा है।
शांति देवी, बनलेख =
-गर्मी शुरू होते ही बनलेख में पानी की किल्लत शुरू हो जाती है। मूल स्रोत से आने वाला पानी भी वर्तमान में स्टॉक टैंक तक नहीं पहुंच पा रहा है। इसके चलते बनलेख में अप्रैल में पानी की बूंद नहीं टपकी है।
लक्ष्मी देवी. बनलेख फोटो
-पानी के लिए महिलाएं सुबह पांच बजे धारे-नौले पहुंच रही हैं। पानी कम होने से दो-तीन घंटे बाद घर वापस आ रही हैं। चंतोला में लगा हैंडपंप भी शोपीस बना हुआ है। अब तक कोई कर्मचारी हैंडपंप ठीक करने के लिए नहीं पहुंचा।
जय दत्त जोशी, चंतोला