श्यामपट के बगैर पढ़ने को मजबूर भिंगराड़ा आईटीआई के छात्र।
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एक कमरा, एक ट्रेड और एक शिक्षक (अनुदेशक)। ये तस्वीर किसी राजकीय प्राथमिक विद्यालय की नहीं, बल्कि भिंगराड़ा के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) की है। सबसे बड़ी परेशानी यह है कि पढ़ाई करने वाले छात्रों के पास न मेज है, और नहीं पढ़ाने वालों (अनुदेशक) के लिए श्यामपट (ब्लैकबोर्ड) है। श्यामपट नहीं होने से छात्रों को पाठ्यक्रम को समझने में दिक्कत आ रही है। कम जगह और अनुदेशकों की तैनाती नहीं होने से यहां मोटर मैकेनिक और फीटर के ट्रेड शुरू ही नहीं हो पा रहे हैं। प्रभारी का दायित्व भी खेतीखान के आईटीआई के जिम्मे हैं।
पाटी विकासखंड के भिंगराड़ा में 2015 में आईटीआई खोला गया। कांग्रेस और भाजपा दोनों दलों के नेताओं ने इसे अपनी उपलब्धि भी बताया। लेकिन इसकी खामियों की भी अनदेखी जारी रही। आईटीआई में इस समय चल रहे इलैक्ट्रिशियन के इकलौते ट्रेड में दो छात्राओं सहित कुल 14 छात्र प्रथम वर्ष में पढ़ रहे हैं।
जबकि 12 छात्र नवंबर महीने में अंतिम वर्ष की परीक्षा दे चुके हैं। इन छात्रों को पढ़ाने का जिम्मा एकमात्र अनुदेशक का है। मगर छात्रों के बैठने के लिए पुख्ता इंतजाम नहीं है। कभी दुकान रहे इस एक कमरे में ये आईटीआई चल रहा है। अनुदेशक के अलावा एक-एक चौकीदार और अनुसेवक तो जरूर है, मगर न पीने के पानी की व्यवस्था है और नहीं शौचालय की।
भवन के लिए ग्रामीणों ने की है जमीन दान
भिंगराड़ा के आईटीआई के लिए ग्रामीण जगदीश भट्ट व महेश भट्ट ने 32 नाली भूमि दान की है। इस जमीन को पंजीकृत भी किया जा चुका है। जीआईसी के नजदीक आईटीआई भवन का निर्माण किया जाएगा। लेकिन अभी इसके निर्माण के लिए बजट स्वीकृत नहीं हुआ है। ग्राम प्रधान धर्मानंद भट्ट, पैरा लीगल वालंटियर उमेश भट्ट, कृष्णा भट्ट सहित यहां के तमाम नागरिकों ने भवन का शीघ्र निर्माण कराने के अलावा अन्य व्यवस्थागत खामियों को दूर करने की मांग की है।
कोट
भिंगराड़ा आईटीआई में जगह की भारी कमी है। एक छोटे कमरे में कक्षा चल रही है। जिसमें छात्रों का बैठना भी मुश्किल हो रहा है। श्यामपट नहीं होने से पढ़ाने में भी कठिनाई आ रही है। कुर्सियां तो मिल गई है, लेकिन अभी मेज नहीं दी गई है।
हरीश पांडेय,अनुदेशक,आईटीआई, भिंगराड़ा।