चंपावत। जिले में क्षय रोगियों (टीबी) के बलगम की जांच की सुविधा चार स्थानों पर उपलब्ध है। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ.इंद्रजीत पांडेय के अनुसार टनकपुर और लोहाघाट संयुक्त चिकित्सालय, जिला अस्पताल चंपावत तथा पाटी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में बलगम जांच की सुविधा उपलब्ध है।
इसके अलावा बीते तीन वर्ष से जिला अस्पताल में सीडीनॉट मशीन के जरिये बलगम की जांच की जा रही है। वर्तमान में जिले में क्षय रोग के 242 केस एक्टिव चल रहे हैं तथा 241 मरीजों का उपचार हो चुका है। वर्ष 2020 में टीबी से 25 लोगों की मौतें हो चुकी हैं। पोषण भत्ते के तहत टीबी मरीजों को प्रतिमाह पांच सौ रुपये की धनराशि प्रदान की जाती है। जिला क्षय नियंत्रण केंद्र में कई पद रिक्त चल रहे हैं। इनमें डीपीसी का महत्वपूर्ण पद खाली है। एक्सरे मशीन तो लगी हैं लेकिन अभी तक तकनीशियन की तैनाती नहीं हो पाई है। (संवाद)
कई तरीकों से मनुष्य के शरीर में प्रवेश करता है बैक्टीरिया
चंपावत। जिला क्षय नियंत्रण अधिकारी डॉ.इंद्रजीत पांडेय के अनुसार टीबी का बैक्टीरिया कई तरीकों से मनुष्य के शरीर में प्रवेश करता है। टीबी एक संक्रामक बीमारी है, जिसके होने पर रोगी का शरीर कमजोर हो जाता है। उसका वजन कम होने लगता है और थकान महसूस होने लगती है। इसके साथ ही रोगी को खांसी व तेज बुखार भी होने लगता है। बीमारी का प्रभाव रोगी के फेफड़ों, हड्डियों, ग्रंथियों तथा आंतों में कहीं भी देखने को मिल सकता है। इसके बैक्टीरिया इतने सूक्ष्म होते हैं कि एक्सरे के जरिये ही उनकी पहचान की जा सकती है। किसी भी क्षय रोगी के संपर्क में रहने से उसके खांसने, छींकने व थूकने से बैक्टीरिया स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। (संवाद)
लगातार कम होती जा रही है टीबी रोगियों की संख्या
चंपावत। जिले में क्षय रोग (टीबी) से निपटने को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों के कारण टीबी रोगियों की संख्या लगातार कम होती जा रही है। जबकि बलगम जांच कराने वालों की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। टीबी रोग पर नियंत्रण रखने के लिए पूर्व में चलाए गए डायरेक्टली आब्जवर्ड ट्रीटमेंट विद् शार्ट कोर्स (डाट्स) के तहत रोगियों को दवाएं देने के स्थान पर अब प्रतिदिन रोगियों को डाक्टरों की निगरानी में दवाएं दी जा रही हैं। चंपावत जिला मुख्यालय में वर्ष 2004 में क्षय नियंत्रण केंद्र खोला गया है।(संवाद)