निगम प्रबंधन और सरकार पर परिवहन निगम के अस्तित्व को खतरे में डालने का आरोप लगाते हुए रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद ने चरणबद्ध आंदोलन शुरू कर दिया है। उन्होंने मंगलवार को जुलूस निकालकर प्रदर्शन किया। इसके बाद मंडलीय प्रबंधक (संचालन) कार्यालय के सामने दो दिवसीय धरने पर बैठ गए हैं।
परिषद के क्षेत्रीय अध्यक्ष भुवन चंद्र पांडेय के नेतृत्व में रोडवेज कर्मियों ने निगम प्रबंधन और प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए जुलूस निकालकर प्रदर्शन किया। संगठन ने कहा है कि प्रदेश सरकार और निगम प्रबंधन के गलत फैसलों से निगम का अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। कहा कि तीन सौ चालकों की भर्ती पर लगाई रोक लगाने से बसों का नियमित संचालन नहीं हो पा रहा है।
इससे निगम को हर 25 से 30 लाख रुपए का नुकसान हो रहा है।
संगठन ने भर्ती पर लगी रोक लगाने के साथ ही हर वर्ग के कर्मचारियों को माह के पहले दिन वेतन का भुगतान करने, वाह्यस्रोत चालक-
परिचालकों, तकनीकी संवर्ग के कर्मचारियों को नियमित करने, सेवानिवृत्त एवं मृतक कर्मचारियों के लंबित 125 करोड़ की देनदारी का भुगतान करनेे, सरकार द्वारा संचालित योजनाओं को निगम को अविलंब भुगतान करने और टैक्सी वाहनों के अवैध संचालन एवं डग्गामारी पर प्रभावी अंकुश लगाने की मांग उठाई है।
अध्यक्ष ने बताया कि बुधवार को भी धरना-प्रदर्शन जारी रखने का एलान किया। 6 दिसंबर को देहरादून में मुख्यमंत्री आवास कूच कार्यक्रम, 9 और 10 दिसंबर को सामूहिक अवकाश लेकर कार्य बहिष्कार किया जाएगा। 12 दिसंबर से अनिश्चितकालीन चक्काजाम शुरू किया जाएगा। प्रदर्शन में मंत्री बलदेव प्रसाद, इंद्र सिंह बिष्ट, सतीश ज्याल, राजेंद्र मलिक, गिरीश सक्सेना, प्रकाश वन, संजीव कुमार, सुशील, लीलाधर शर्मा, किशोर नेगी, नरेंद्र द्विवेदी, रमेश भट्ट, विपुल जौहरी, टीका अधिकारी, उमेश पंत आदि शामिल थे।