फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ये जमीं जब न थी, ये जहां जब न था...

Sun, 21 May 2017 11:04 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो चंपावत
विज्ञापन
तीन दिवसीय उर्स में कव्वाल प्रस्तुत करते कलाकार - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
 हथरंगिया स्थित हजरत कालू सैय्यद बाबा की मजार शरीफ  में तीन दिनी उर्स कुल शरीफ के साथ संपन्न हो गया। इस दौरान विभिन्न स्थानों से आए जायरीनों ने बाबा की मजार में चादरपोशी कर मन्नतें मांगी। 
विज्ञापन

 शनिवार की देर रात तक चंपावत, पिथौरागढ़, पीलीभीत, रानीखेत, अल्मोड़ा, धारचूला, बरेली आदि स्थानों से आए जायरीनों ने बाजार की मजार में चादरपोशी की गई। रात को उत्तराखंड वारसी कव्वाल पिथौरागढ़ के सलमान बख्श, रवि भाई और समीर बख्श के साथ अन्य कव्वालों ने बाबा की शान में शानदार कलाम पेश कर वाहवाही लूटी। कव्वालों ने ये जमीं जब न थी, ये जहां जब न था अल्ला हूं अल्ला हूं, दमादम मस्तकलंदर, भर दो झोली मेरी या मोहम्मद, अनवारे मुहम्मद समेत कई दिलकश कव्वालियां पेश की।

रविवार को सुबह कुल शरीफ  के बाद उर्स का समापन हुआ। वक्फ बोर्ड के सदर बाबा हसमत के अलावा कमेटी के लोगों ने मुल्क की तरक्की और खुशहाली की दुआ मांगी। कहा कि कालू सैय्यद बाबा की मजार पर होने वाले उर्स पर मुस्लिमों के अलावा हिन्दू भाइयों की भी पूरी आस्था है। इस मौके पर जावेद यार खां, डॉ. योगेश चतुर्वेदी, बल्लू माहरा, नाजिस हुसैन, जाहिद सिद्दीकी, रसीद सिद्दीकी, नजर सिद्दीकी, अजहर सिद्दकी, रईस हुसैन, सलीम, निस्सू खान आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन


 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें