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नियमों को ताक पर रखकर दी गई थी लीज

Sun, 20 Dec 2015 11:19 PM IST
चंद्रशेखर जोशी/अमर उजाला, चंपावत
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टनकपुर की पंचमुखी महादेव धर्मशाला को खाली कराने को लेकर 19 दिसंबर को जिला पंचायत और धर्मशाला समिति के बीच विवाद हुआ था। नौबत गरमागरमी की भी आई। जून 2014 में तो धर्मशाला की जमीन की 25 साल की लीज भी खत्म हो चुकी है, मगर इसका सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि नैनीताल जिला पंचायत द्वारा 1989 में दी गई लीज ही नियम के अनुरूप नहीं थी। लीज पर देने के लिए प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। ये आख्या खुद इस साल मामले की जांच करने वाली प्रशासनिक जांच दल की है।
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खोड़ वाली 1 बीघा 6 बिस्वा जमीन पंचमुखी महादेव धर्मशाला समिति टनकपुर (तब नैनीताल जिले का हिस्सा) को 21 जून 1989 में 25 साल के लिए नैनीताल जिला पंचायत ने लीज पर दी थी। इस लीज की अवधि जून 2014 को पूरी हो चुकी है। बाद में चंपावत जिला पंचायत ने इसकी लीज नहीं बढ़ाने का निर्णय लेते हुए बोर्ड में प्रस्ताव पास किया। यह मामला इस साल जून में टनकपुर के दौरे पर आए मुख्यमंत्री हरीश रावत के सम्मुख भी समिति ने उठाया था। टनकपुर के एसडीएम नरेश दुर्गापाल और जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी शेर सिंह परगाई ने मामले का परीक्षण किया।

29 जून को डीएम को भेजी जांच आख्या में सबसे चौंकाने वाला बिंदु यह था कि लीज पर जमीन देने में उप्र जिला पंचायत तथा क्षेत्र पंचायत नियमावली 1965 के तहत नियम 8 से 12 में उल्लिखित प्रावधानों का पालन किए बगैर ही टनकपुर खोड़ भूमि (मौजूदा धर्मशाला) को अवैध रूप से लीज पर दिया गया था, जबकि नियमावली में पंचायत की भूमि को मंडलायुक्त/शासन की अनुमति के बिना लीज पर दिए जाने का प्रावधान नहीं है, मगर तत्कालीन पंचायत ने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर बिना शासन की अनुमति लिए इस जमीन को 25 वर्ष के लिए पंचमुखी महादेव धर्मशाला के पक्ष में लीज विलेख का संपादन किया है।
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रिपोर्ट के मुताबिक लीज विलेख न तो उप निबंधक कार्यालय में रजिस्टर्ड कराई है और नहीं पंचायत के सक्षम अधिकारी के हस्ताक्षर है। इसे 435 रुपये मूल्य के चार स्टांप पेपर पर तैयार कर तत्कालीन जिला पंचायत अध्यक्ष द्वारा पंचमुखी समिति के पक्ष में लिखा गया था। जांच समिति ने कहा कि इन स्टांप पेपरों का कोई विधिक महत्व नहीं है। साथ ही यह कथित विलेख के अनुसार लीज की अवधि भी जून 2014 में समाप्त हो चुकी है।

लीज में प्रक्रियाओं के पालन संबंधी जानकारी तब समिति को नहीं थी। समिति के पास जिला पंचायत नैनीताल से मिला सहमति पत्र है, अगर समिति को प्रक्रियाओं की जानकारी दी गई होती, तो वह उसका पालन भी कराती। जमीन वापस करने का अंदेशा होता, तो इस जगह पर तिमंजिला भवन ही क्यों बनाते। इस भवन को लोगों से मिले सहयोग और दान से धर्मार्थ बनाया गया है। जिला पंचायत के प्रतिनिधि को रखने के लिए अनुरोध किया गया था, मगर पंचायत ने अब तक किसी प्रतिनिधि को भेजा नहीं। -मदन मोहन अग्रवाल, अध्यक्ष, पंचमुखी महादेव धर्मशाला समिति, टनकपुर।

टनकपुर खोड़ भूमि (पंचमुखी महादेव धर्मशाला) की 25 साल की लीज जून 2014 में पूरी हो चुकी है। पहले की लीज भी नियमानुसार नहीं थी। जिला पंचायत बोर्ड किसी भी रूप में समिति को इसे नहीं देने का निर्णय कर चुकी है। समिति को पांच नोटिस दिए जा चुके हैं। पंचायत मां पूर्णागिरि मेले में आने वाले निर्धन तीर्थयात्रियों को निशुल्क सुविधा देने के अलावा अन्य धर्मार्थ का कार्य स्वयं संचालित करेगी। -खुशाल सिंह अधिकारी, अध्यक्ष, जिला पंचायत, चंपावत।
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