पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड में संचालित अस्पताल में अव्यवस्थाएं कम नहीं हो रही है। अस्पताल में भर्ती मरीजों को भी इलाज के लिए तरसना पड़ रहा है। इससे भड़के तीमारदारों ने रविवार को अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया। आरोप लगाया कि उन्हें न तो खाना मिल रहा है और नहीं दवाएं। मुख्य चिकित्साधिकारी डा.विनोद टोलिया के सख्त रवैया अपनाने के बाद पीपीपी अस्पताल प्रशासन हरकत में आया।
बकरियाज्यूला गांव से आई गीता देवी (25) की कमर में चोट है। पांच दिनों से वह तकलीफ में है। झिरकुनी की पूर्व ग्राम प्रधान हीरा देवी भी वार्ड में भर्ती है। छह दिन से भर्ती पनार की राधिका देवी, डकला की सुनीता देवी, कानाकोट की कमला देवी से दवाएं बाहर से मंगाई गई थी, जबकि उनके पास बीपीएल कार्ड के अलावा मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना का भी कार्ड था। पुनौली गांव की तुलसी देवी के कमर में चोट होने के कारण उसे डोली से पांच किमी लाने के बाद यहां भर्ती किया गया, जहां तीन घंटे तक किसी ने सुध नहीं ली।
डांडा ककनई से आई पार्वती के साथ भी ऐसा ही व्यवहार अस्पताल में हुआ। सीएमओ के हस्तक्षेप के बाद शील अस्पताल के राजेंद्र जोशी ने रोगियों की दवा का इंतजाम करवाया। प्रदर्शन करने वाले लोगों का कहना था कि अस्पताल में व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं है, जिसका खामियाजा आम लोग भुगत रहे हैं।
लोहाघाट अस्पताल की व्यवस्थाओं को पटरी में लाने के पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। शीघ्र ही यहां नए सीएमएस की भी तैनाती की जाएगी। इसके अलावा अन्य वरिष्ठ डॉक्टर व्यवस्था पर नजर रखेंगे। मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना एवं बीपीएल कार्ड धारकों को शासन द्वारा देय सभी सुविधाएं दी जाएंगी। -डा.विनोद टोलिया, सीएमओ, चंपावत।