16 दिसंबर को पीपीपी मोड संचालित अस्पताल प्रबंध समिति की बैठक में रोगियों को बाजार से दवाएं नहीं मंगाने के सख्त निर्देश दिए गए थे। इसके अलावा रोगियों को बेहतर सेवाएं देने का भी दावा किया गया था, लेकिन दो दिन बाद अमर उजाला की टीम सुबह नौ बजे जब अस्पताल पहुंची तो वहां कोई भी डॉक्टर नहीं पहुंचे हुए थे, जबकि यहां पंचेश्वर आदि स्थानों से रोगी पहुंच चुके थे।
उसके बाद 12 बजे टीम दोबारा अस्पताल पहुंची तो रोगियों को बाजार से दवाएं लाते हुए देखा गया। वार्ड में भर्ती एकमात्र रोगी के लिए अस्पताल से भोजन की व्यवस्था की गई थी। नंदी रावत, पुष्कर नाथ, निर्मला देवी, पूजा, हयात सिंह आदि का कहना है कि उनसे सभी दवाएं बाजार से मंगाई गई है।
उनका कहना था कि सीएमएस ने निर्धारित दुकान से पर्ची के आधार पर दवा लाने के लिए कहा गया, जिसका भुगतान अस्पताल की ओर से किया जाएगा, लेकिन रोगी जब मेडिकल स्टोर में गए तो डीलर का कहना था कि सीएमएस ने दवा मुफ्त में नहीं देने को कहा है। अमर उजाला की टीम ने पाया कि जिन लोगों को दवा बाजार से लाने के लिए कहा गया था वह बेहद गरीब थे, लेकिन उनके पास बीपीएल कार्ड नहीं था। अस्पताल के बाल रोग, ईएनटी, स्त्री रोग के वार्डों में ताला लटका था। यहां एक दर्जन डॉक्टरों के स्थान पर केवल चार डॉक्टर ही देखे गए।
बीपीएल को ही मिलेंगी निशुल्क दवा
सीएमएस डा.मंजीत सिंह ने बताया कि निशुल्क दवाओं की सुविधा केवल बीपीएल कार्डधारकों को ही देय है। इसलिए दवा देना बंद कर दिया गया था। अब केवल बीपीएल कार्ड धारकों को ही दवाएं दी जाएंगी।
सीडीओ ने निर्णय पर जताई हैरानी
सीडीओ एसएस पांगती ने सीएमएस द्वारा केवल बीपीएल कार्डधारकों को ही दवाएं देने के निर्णय पर हैरानी जाहिर की। उनका कहना है कि गरीब रोगियों का हित पूरी तरह सुरक्षित रखा जाना चाहिए। यदि इसका उल्लंघन किया जा रहा है तो इसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।