राजकीय पॉलिटेक्निक में कार्यरत संविदा प्रवक्ताओं और कार्यशाला अनुदेशकों को पिछले नौ माह से मानदेय के लाले पड़ गए हैं। राजकीय पॉलिटेक्निकों में स्थायी नियुक्ति न किए जाने से संविदा शिक्षकों पर ही पूरा दारोमदार टिका हुआ है।
राजकीय पॉलिटेक्निक लोहाघाट में कुल 39 प्रवक्ताओं और कार्यशाला अनुदेशकों में 13 प्रवक्ता और अनुदेशक संविदा में रखे गए हैं। जो पिछले तीन से छह सालों से लगातार कार्य करते आ रहे हैं। अगस्त 2015 में संविदा प्रवक्ताओं का नया अनुबंध किया गया। जबकि उन्हें अप्रैल 2015 से अब तक मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है। सरकार जुलाई में अवकाश के कारण इस माह का मानदेय नहीं देती है। प्रवक्ताओं को 30 हजार रुपये तथा अनुदेशकों को 20 हजार रुपये मासिक मानदेय पर नियुक्त किया गया है।
लंबे समय से मानदेय न मिलने के कारण यहां कार्यरत 13 प्रवक्ता और अनुदेशकों के सामने गंभीर आर्थिक संकट पैदा हो गया है। मानदेय की मांग को लेकर एक माह पूर्व यहां आए सीएम हरीश रावत के सामने संविदा शिक्षक कैलाश शंकर, मनीष भट्ट, आशीष बिष्ट, नितेश विश्वकर्मा ने अपनी समस्याएं रखीं। सीएम ने शीघ्र समस्या निस्तारण का आश्वासन दिया था। लेकिन एक माह बीत जाने के बाद भी हालात जस के तस हैं।
बजट आवंटित न होने से पैदा हुई समस्या
इस संबंध में प्रधानाचार्य गोविंद बल्लभ ने कहा शासन स्तर से नॉन प्लांड पॉलिटेक्निकों को बजट आवंटित न किए जाने से यह समस्या पैदा हुई है। इससे राज्य के देहरादून समेत 15 पॉलिटेक्निकों में कार्यरत संविदा शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं। शासन स्तर पर प्लान में मिले बजट को नॉन प्लान में परिवर्तित किए जाने की पहल की जा रही है।