चंपावत। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद और कुमाऊं विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग की ओर से बृहस्पतिवार को यहां कलक्ट्रेट में एक दिनी कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें भौगोलिक सूचना तंत्र (जीआईएस) के प्रशासन, विकास, नियोजन में अनुप्रयोग की जानकारी दी गई।
कार्यशाला में अगले तीन माह में जिले के सभी विभागों द्वारा जीआईएस तैयार करने को कहा गया। निर्धारित फॉर्मेट में विभागों का जीआईएस तैयार करने के निर्देश दिए गए। जिले का विभागवार जीआईएस बनाने के लिए जीआईएस प्रकोष्ठ का शुभारंभ किया गया।
एनआरडीएमएस केंद्र के निदेशक प्रो. जेएस रावत ने जिला नियोजन और प्रशासनिक कार्यों में जीआईएस तकनीक का महत्व बताया। इस तकनीक की मदद से किसी स्थान और क्षेत्र विशेष के बारे में मानचित्र सहित सूचना कंप्यूटर में आसानी से मिल जाती है।
कार्यशाला में जीआईएस तैयार करने की विधि, जीपीएस, सैटेलाइट डेटा से जिस्टैपिंग और जियोकोडिक करने के अलावा डिजिटल तकनीक, रिमोट सेंसिंग, हाइटेक गतिविधियों से सुसज्जित नई तकनीक की जानकारी दी गई। बताया गया कि इसके अंतर्गत पुराने आंकड़ों के साथ ही नए आंकड़ों को भी संशोधित किया जा सकता है।
जिले का विभागवार जीआईएस तैयार करने के लिए जीआईएस प्रकोष्ठ का शुभारंभ किया गया। इस तकनीक की मदद से किसी स्थान और क्षेत्र विशेष के बारे में मानचित्र सहित सूचना कंप्यूटर में आसानी से मिल जाती है। कार्यशाला में विभिन्न विभाग, आपदा प्रबंधन, निर्वाचन, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, पुलिस सहित विभिन्न कार्यदायी संस्थाओं में नियोजन, अनुश्रवण और प्रबंधन के लिए जीआईएस तकनीक के उपयोग की पावर प्वाइंट प्रजेंटेशन दिया।
सीडीओ डॉ. आरएस पोखरिया ने अध्यक्षता की। इस दौरान वैज्ञानिक विनोद रावत, तकनीकी सहायक नरेश पंत, एसडीएम सीमा विश्वकर्मा, निर्मला बिष्ट, एपीडी केएन तिवारी, डीडीओ विवेक उपाध्याय, समाज कल्याण अधिकारी पीसी जोशी, एसीएमओ डॉ. रश्मि पंत आदि थे।