लोहाघाट। बाराकोट ब्लाॅक के ग्राम सभा पम्दा और लोहाघाट में बलाई के जंगलों में आग लगने से लाखों का नुकसान हुआ। ग्राम सभा पम्दा के जंगलों में लगी आग मयो तोक तक पहुंच गई। घास से लेकर घर के कामों के लिए रखी लकड़ियों के ढेर भी जलकर राख हो गए। जंगलों की आग के चलते जनता बेहद परेशान है।
ग्राम प्रधान सुनीता गोस्वामी ने बताया कि आग से घास के दस लुट्टे जलकर राख हो गए। इसके साथ ही चार लकड़ियों की ढेरियों को भी आग ने अपनी चपेट में ले लिया। बताया कि आग से पूरा जंगल तबाह हो गया है। वन संपदा और लोगों को भारी नुकसान हुआ है। आग लगने की सूचना वन विभाग और राजस्व उप निरीक्षक को दी गई है। ग्रामीणों ने वन विभाग और जिला प्रशासन से मुआवजा देने की मांग की है।
गोविंद देवी, सुमन गोस्वामी, प्रहलाद राम, ईश्वरी राम, संजय कुमार, कुंती देवी, सुमित कुमार, बबीता देवी आदि ग्रामीणों ने बमुश्किल आग पर काबू पाया। लोहाघाट के बलाई के जंगलों में भी बुधवार शाम आग लगी। दमकल कर्मियों में पूजा राणा, कोमल राणा, पारस वर्मा, भैरव सिंह आदि के सहयोग से आग पर किसी तरह काबू पाया।
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वनों में आग की घटना से मानवाधिकार आयोग सख्त
क्रासर: आयोग ने शासन से छह बिंदुओं पर मांगी आख्या
संवाद न्यूज एजेंसी
थल (पिथौरागढ़)। प्रदेश के वनों में लगी भीषण आग को लेकर उत्तराखंड मानव अधिकार आयोग देहरादून सख्त हो गया है। आयोग ने कई वर्षों से ग्रीष्म ऋतु में लगने वाली आग को वन संपदा, पर्यावरण, वन्य जीवों और मानव जीवन के लिए घातक बताया है। आयोग ने वनों में लगने वाली आग को प्रथम दृष्टा वृहत रूप से मानवाधिकारों को विपरीत रूप से प्रभावित करने वाला बताया है।
मानवाधिकार आयोग के सदस्य पूर्व जज गिरधर सिंह धर्मशक्तू के समक्ष आयोग ने स्वतः इसका संज्ञान लेकर एक आदेश जारी करते हुए वन अग्निकांड पर प्रमुख सचिव वन एवं प्रमुख मुख्य वन संरक्षक से छह बिंदुओं पर आख्या मांगी है। आयोग के सदस्य गिरधर सिंह धर्मशक्तू ने बताया कि आख्या में वनों में लगने वाली आग के कारण, बचाव के उपाय, प्रसार और क्षति को रोकने के क्या उपाय हुए, जन सामान्य को इस घटना में कोई पूर्व चेतावनी और उसकी रोकथाम के संबंध में उन्हें प्रशिक्षित किया गया या नहीं आदि मांगी गई है। आग की घटनाओं से प्रभावित जैव विविधता, वन संपदा, वन्य जीव और जन धन की क्षति का कोई आंकलन हुआ है। अग्नि प्रसार निवारणार्थ कोई स्थायी और दूरगामी योजना शासन स्तर में विचाराधीन है। आग की घटनाओं के लिए उत्तरदायी व्यक्तियों को चिन्हित कर उसके विरुद्ध कोई कार्यवाही हुई है। इन बिंदुओं पर आयोग ने 12 सितंबर तक पत्रावली पेश करने का आदेश दिया है।