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देवराड़ी बैंड पर अचानक टूटा बस का फैन बेल्ट: बीच सड़क पर खड़ी रह गई पिथौरागढ़ डिपो की बस; 34 यात्री फंसे

Wed, 07 Oct 2026 11:44 PM IST
Heera अमर उजाला नेटवर्क, चंपावत

सार

चंपावत राष्ट्रीय राजमार्ग पर देवराड़ी बैंड के पास पिथौरागढ़ डिपो की बस फैन बेल्ट टूटने के कारण बीच सड़क में खड़ी हो गई। बस देहरादून से झूलाघाट जा रही थी और उसमें 34 यात्री सवार थे। बस खराब होने पर यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
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चंपावत और लोहाघाट के बीच देवराड़ी बैंड के पास खड़ी पिथौरागढ़ डिपो की बस। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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चंपावत राष्ट्रीय राजमार्ग पर देवराड़ी बैंड के पास पिथौरागढ़ डिपो की बस फैन बेल्ट टूटने के कारण बीच सड़क में खड़ी हो गई। बस देहरादून से झूलाघाट जा रही थी और उसमें 34 यात्री सवार थे। बस खराब होने पर यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

मंगलवार शाम यूके 07 पीए 4199 नंबर की बस देहरादून से झूलाघाट के लिए रवाना हुई थी। रातभर सफर करने के बाद बुधवार सुबह करीब 7:30 बजे बस चंपावत और लोहाघाट के बीच देवराड़ी बैंड के पास पहुंची। तभी बस का फैन बेल्ट टूट गया। इस पर चालक को गाड़ी बीच सड़क पर रोकनी पड़ी।

चालक और परिचालक ने उसे ठीक करने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद बस को सड़क किनारे खड़ा कर दिया। परिचालक ने बस खराब होने की सूचना पिथौरागढ़ डिपो को दी। डिपो के अधिकारियों ने पिथौरागढ़ की ओर लौट रही देहरादून, दिल्ली समेत अन्य रूटों की बसों के परिचालकों से संपर्क किया। इसके बाद यात्रियों को तीन अलग-अलग बसों से पिथौरागढ़ भेजा गया।

फैन बेल्ट टूटने के कारण देहरादून से पिथौरागढ़ आ रही बस को चंपावत में देवराड़ी बैंड के पास खड़ा करना पड़ा। बस में सवार यात्रियों को तीन बसों से पिथौरागढ़ पहुंचाया गया। इसके बाद दूसरे वाहन की व्यवस्था कर यात्रियों को झूलाघाट भेजा गया।

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- रवि शेखर, आरएम, पिथौरागढ़ डिपो

आंतरिक मार्गों की खराब हालत से रोडवेज बसें नदारद, टैक्सियों का बोलबाला
पिथौरागढ़ जिले के कई आंतरिक मार्गों पर रोडवेज सेवा वर्षों से बंद है। विभिन्न रूटों पर बस सेवा चल रही है लेकिन बसों की कमी सार्वजनिक परिवहन के बेहतर और सुविधाजनक संचालन के आगे रोड़ा बनी हुई है। ऐसे में आंतरिक मार्गों पर अधिकतर यात्री टैक्सियों के भरोसे चल रहे हैं। निजी परिवहन व्यवसाय बढ़ गया है और रोडवेज यात्रियों की कमी से जूझ रहा है।

कभी डीडीहाट से देहरादून, मड़मानले-खटीमा, पिथौरागढ़-पस्मा-भागीचौरा व पीपली सहित रोडवेज की कई बस सेवाएं जिले के आंतरिक और दूरदराज के इलाकों को सीधे जोड़ती थीं लेकिन उत्तराखंड परिवहन निगम और सरकारी स्तर से सार्वजनिक परिवहन की बेहतरी और फैलाव से हाथ खींचे जाने लगे और धीरे-धीरे निजी परिवहन व्यवसाय बढ़ता गया। अब स्थिति ये है कि जिन रूटों पर निगम की बसें चल भी रही हैं वहां निजी परिवहन व्यवस्था से उसे लगातार चुनौती मिल रही है।

जिला मुख्यालय से नजदीक के इलाके हों या दूर के सभी जगह टैक्सियों का बोलबाला है। टैक्सी संचालकों में भी सवारियां खींचने की आपसी होड़ है। यात्री कभी जल्दी निकलने के चक्कर में धक्के खाने को मजबूर हैं तो कभी सवारियां भरने के लंबे इंतजार से परेशान। वहीं रोडवेज सेवाओं को बेहतर करने के लिए नई बसों और कार्मिकों की कमी दूर होने के इंतजार में है।

टैक्सियां ही बनी हैं आंतरिक मार्गों पर आवाजाही का सहारा
जिले के कनालीछीना, मड़मानले, अस्कोट, भागीचौरा, पीपली, डीडीहाट, बलुवाकोट, धारचूला, मदकोट, बरम, मुनस्यारी रूट पर प्रतिदिन करीब डेढ़ सौ टैक्सियां चलती हैं। जो अत्यंत खराब मार्गों से होकर विभिन्न ग्रामीण इलाकों को भी जोड़ती हैं। यही स्थिति वड्डा-झूलाघाट, गौड़ीहाट, गंगोलीहाट, बेड़ीनाग, थल, नाचनी, मुवानी, बुंगाछीना, देवलथल, सुवालेक-झूणी-मलान, रसैपाटा-अलगड़ा, चंडाक-बांस, आठगांवसिलिंग, बढ़ावे आदि इलाकों की भी है। इन इलाकों के लिए भी डेढ़-दो सौ टैक्सियों का संचालन होता है लेकिन अधिकतर जगह आंतरिक मार्ग बदहाल हैं जिससे लोगों को आवाजाही में काफी दिक्कतें उठानी पड़ रही हैं।

इक्का-दुक्का बसों का साथ हर किसी के बस की बात नहीं

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जिले में रोडवेज बस सेवा अस्कोट, डीडीहाट, मदकोट, गंगोलीहाट, बेड़ीनाग, थल, धरमघर, धारचूला, झूलाघाट जैसे प्रमुख इलाकों के साथ ही छोटे कस्बों और गांवों को जोड़ती है लेकिन बसों की कमी से इन मार्गों पर एक-एक, दो-दो सेवाएं ही चल रही हैं। पिछले दिनों धारचूला के दूरस्थ क्षेत्र पांगला से दिल्ली के बीच शुरू हुई सेवा, बस की कमी और मार्ग लगातार बाधित रहने से फिलहाल बंद है। ऐसे में व्यास घाटी-आदि कैलाश के लिए बस सेवा शुरू होना दूर की कौड़ी नजर आ रहा है। वाया मदकोट होकर सीमांत क्षेत्र मुनस्यारी के लिए भी बस सेवा शुरू नहीं हो पा रही है। नई बसें सितंबर तक मिलने की बात कही जा रही थी परंतु अब तक नहीं मिलीं।

बोले लोग

पिथौरागढ़-थल रूट पर रोडवेज की सिर्फ एक बस चलती है। उसके समय से आना-जाना हो तो ठीक, परंतु जल्दी निकलने या काम अटकने पर उसका लाभ नहीं मिल पाता। -आनंदी बसेड़ा, सुवालेक

राज्य आंदोलनकारी या फिर 60 साल से अधिक की उम्र के लोग बस के इंतजार में रहते हैं, लेकिन कई बार इसका संचालन न होने पर लोगों को मायूस होना पड़ता है। - पुष्कर सिंह, बुंगाछीना

जीप-टैक्सी में अक्सर सवारियों को असुविधाजनक स्थिति में बिठाकर ले जाया जाता है। कई बार सवारियां पूरी होने के इंतजार में बैठे-बैठे परेशानी झेलनी पड़ती है। बसें नियमित और अधिक संख्या में होने पर लोगों को काफी सुविधा मिलती और टिकट भी कम लगता।
- जीवंती देवी, देवलथल

नई बसें मिलने पर मुनस्यारी तथा डीडीहाट-देहरादून के बीच सेवा संचालित करने का प्रयास रहेगा। इससे अन्य आंतरिक मार्गों पर भी बस संचालन और बेहतर होगा। -आरएस कापड़ी, एआरएम, पिथौरागढ़

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