लधिया घाटी की स्वास्थ्य सेवाओं के हाल बेहद खराब हैं। वह भी तब, जब यहां टांण, रीठा साहिब और भिंगराड़ा में स्वास्थ्य केंद्र हैं। शनिवार को लधिया घाटी के मंगललेख गांव के 64 वर्षीय एक बुजुर्ग मरीज को नदी और रोखड़ पार कराते हुए डोली के सहारे इलाज के लिए निजी अस्पताल ले जाया गया। इलाज के बाद मरीज की हालत में मामूली सुधार है।
मंगललेख ग्राम पंचायत के बोराबगड़ तोक निवासी किशन सिंह बीते कई दिनों से सांस के रोग के अलावा बुखार और खांसी से पीड़ित थे। लधिया घाटी के किसी भी अस्पताल में पैथॉलोजी जांच की सुविधा नहीं है। इसके चलते दवाइयां बगैर परीक्षण के मिल रही थी। इससे उनकी हालात में सुधार नहीं हुआ।
शनिवार को उनकी तबियत अचानक बिगड़ गई। दो दिन से कुछ न खाने से किशन सिंह को कमजोरी की वजह से चक्कर भी आ रहे थे। इस पर परिजनों और क्षेत्र पंचायत सदस्य कुंदन सिंह बिष्ट ने उन्हें बोराबगड़ तोक से करीब तीन किलोमीटर डोली के सहारे रीठा साहिब पहुंचाया। मार्ग पर रतिया और लधिया नदी भी पार करनी पड़ी। फिर रीठा से 62 किलोमीटर दूर लोहाघाट के एक निजी अस्पताल लाकर बुजुर्ग का इलाज कराया गया। अब उनकी हालत में कुछ सुधार है। बीडीसी सदस्य का कहना है कि लधिया घाटी के स्वास्थ्य केंद्रों में इलाज की सुविधा न होने से लोगों को काफी परेशानी हो रही है।
महज चार सरकारी अस्पतालों में पैथॉलोजी जांच की सुविधा
चंपावत।जिले के कई दूरदराज के इलाकों में सरकारी अस्पताल जरूर हैं, मगर यहां जरूरी चिकित्सा सुविधाएं नहीं हैं। कई अस्पताल डॉक्टरों के बिना संचालित हो रहे हैं। पैथॉलोजी जांच की सुविधा भी जिले के 23 अस्पतालों में से महज चार अस्पतालों में है। इसके चलते लोगों को खासी परेशानी झेलनी पड़ रही है। सबसे ज्यादा परेशानी गर्भवती महिलाओं को होती है। जिन्हें विभिन्न पैथॉलोजी जांच के लिए लंबी दौड़ लगानी पड़ती है। इसमें उन्हें परेशानी के अलावा धन भी खर्च करना पड़ता है।
चंपावत जिले के 23 अस्पतालों में से जिला अस्पताल, टनकपुर संयुक्त अस्पताल, लोहाघाट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और पाटी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में ही जांच की सुविधा है। जिले में संचालित अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (एपीएचसी) और स्टेट एलोपैथिक डिस्पेंसरी (एसएडी) में जांच की सुविधा नहीं है। लधिया घाटी के रीठा साहिब, भिंगराड़ा, टांण, तल्लादेश के मंच, तामली, गुमदेश के पंचेश्वर, पुलहिंडोला, बाराकोट, देवीधुरा आदि क्षेत्रों के लोगों को मामूली जांच के लिए भी शहर के अस्पतालों में दौड़ लगानी पड़ती है। इन लोगों को 35 किलोमीटर से 75 किमी तक जाकर विभिन्न जांचों को कराना पड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है कि सबसे ज्यादा परेशानी गर्भवती महिलाओं को होती है। जिन्हें हीमोग्लोबिन सहित विभिन्न जांचों के लिए नियमित रूप से दूर के अस्पताल जाना पड़ता है। इस कवायद में धन खर्च करने के साथ ही बेवजह परेशानी भी होती है। लधिया घाटी के सामाजिक कार्यकर्ता नवीन भंडारी, सुरेंद्र सिंह बोहरा आदि ग्रामीण रीठा साहिब और ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पतालों में पैथोलॉजी जांच की सुविधा की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन हालात नहीं बदले।
कोट
राजकीय एलोपैथिक डिस्पेंसरी में पैथोलॉजी जांच की सुविधा अनुमन्य नहीं है। इसके चलते एसएडी में ये जांचें संभव नहीं है। बाराकोट प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में जांच की सुविधा के प्रयास किए जाएंगे। -डॉ.एमएस बोहरा, मुख्य चिकित्साधिकारी, चंपावत।