शासन ने डीएम सहित हर जिला स्तरीय अफसर को प्रत्येक माह एक रात गांव में रहकर समस्या सुनना अनिवार्य किया है। अफसर तो इस आदेश का पालन करते हैं, लेकिन इस जिले के दूरदराज में तैनात अधिकांश डॉक्टर अपने अस्पताल वाले इलाके में रात नहीं काटते। शासनादेश के विपरीत वे लंबी दूरी तय कर हांफते-हांफते अस्पताल पहुंच रहे हैं। जिले में पांच से अधिक ऐसे डॉक्टर हैं, जो अस्पताल पहुंचने के लिए 10 किमी से 45 किमी तक एक तरफ का सफर करते हैं।
नियमों के मुताबिक डॉक्टर, फार्मेसिस्ट और अन्य कर्मियों को अस्पताल से 8 किमी की परिधि में निवास करना जरूरी है, लेकिन इस नियम का पालन यहां नहीं होता। इस वजह से स्वास्थ्य कर्मियों की जिम्मेदारी और संवेदनशीलता पर भी सवाल उठते रहे हैं। स्वास्थ्य सेवाओं को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए 15 ग्रामीण क्षेत्रों में अस्पताल खोले गए हैं, लेकिन इनमें से ज्यादातर अस्पताल इलाज के बजाय नौकरी की खानापूरी का जरिया बन गया है।
राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित महत्वपूर्ण स्थल चल्थी का टनकपुर से फासला 36 किमी है। इस अस्पताल पहुंचने को डॉक्टर को हर रोज आने-जाने के लिए 72 किमी का सफर करना पड़ता है। वाहन के इंतजार से लेकर इस दूरी को तय करने में तकरीबन 4 घंटे लगते हैं। इसी तरह चंपावत से 32 किमी दूर मंच, 13 किमी दूर धौन, 22 किमी दूर स्वांला, 15 किमी दूर सिप्टी, पाटी से खेतीखान की दूरी 11 किमी है। इन अस्पतालों के डॉक्टर और फार्मेसिस्ट अपने कार्यस्थल पर रात नहीं काटते।
सिप्टी, स्वांला, मंच सहित कई अस्पतालों में आवासीय सुविधा भी है, लेकिन ये आवास आबाद नहीं होने से बर्बाद हाल में हैं। कई जगह ये आवास झाड़ियों से घिर गए हैं।