जलीय पक्षी रिवर लैपविंग। स्रोत: वैज्ञानिक
टनकपुर (चंपावत)। शारदा नदी के किनारे सर्दी के मौसम में दूर-दूर से प्रवासी पक्षी खासी संख्या में विचरण कर रहे हैं। इनमें पक्षी वैज्ञानिक निकट संकटग्रस्त रिवर लैपविंग यानि नदी टिटहरी जलीय पक्षी की चहचहाहट मिलने से उत्साहित हैं। टीम को टनकपुर के शारदा बैराज क्षेत्र में आठ रिवर लैपविंग मिले। जबकि टनकपुर और बनबसा में साइबेरियन पक्षी रूडी शेल्डक ब्राह्मणी बत्तख सर्वाधिक 88 के साथ 17 प्रजातियों के 243 जलीय पक्षी विचरण करते मिले।
एशियन वाटर बर्ड काउंट सर्वे 2026 के तहत वन विभाग और विशेषज्ञ टीम ने शारदा नदी के किनारे शारदा बैराज टनकपुर और बनबसा में जलीय पक्षियों का सर्वे कार्य पूरा कर लिया है। राज्य आर्द्र भूमि प्राधिकरण देहरादून की पक्षी वैज्ञानिक आंचल सकलानी ने बताया कि 18 जनवरी को सर्वे कर पूरा होने पर डाटा एशियन वाटर बर्ड सर्वे एप में डाउनलोड कर दिया है। सर्वे में निकट संकटग्रस्त की श्रेणी में शामिल रिवर लैपविंग मिली है। इन पक्षियों की आबादी वैश्विक स्तर पर निरंतर कम हो रही है। एक अनुमान के अनुसार यह 10 से 30 हजार के बीच हैं। यह नदियों के किनारे रहना पसंद करती है। अब मानव बस्तियों के बढ़ने से इनके आवास नष्ट हो रहे हैं। इनका प्रजनन काल फरवरी से जून के बीच होता है। नदियों से अवैध रेत खनन इनके प्रजनन स्थलों रेतीले किनारे को नष्ट कर देता है।
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रिवर लैपविंग इको इंडिकेडर
रिवर लैपविंग एक इको इंडिकेटर प्रजाति है। इसका मिलना स्वस्थ नदी पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत है। यदि यह किसी नदी के किनारे से गायब हो रही है तो यह उस पारिस्थतिकी तंत्र में असंतुलन का संकेत है। इनका मिलना अर्थात जलीय पक्षियों के लिए क्षेत्र उपयुक्त है। यह भारतीय उप महाद्वीप और दक्षिण पूर्व एशिया की नदियों के किनारे पाई जाती है। वैज्ञानिक आंचल ने बताया कि सर्वे में टनकपुर बैराज में रूडी शेल्डक तो बनबसा बैराज में सर्वाधिक लिटिल इरिगेट 36 मिलीं। दुर्लभ प्रवासी पक्षी पलाश गल, बुली स्टॉर्करेड नेप्ड आइबिस और शिव हंस समेत अनेक प्रजाति के पक्षी भी दिखाई दिए।