काली कुमाऊं के नाम से विख्यात चंपावत और आसपास के इलाकों में खड़ी होली का गायन चरम पर पहुंच गया है। होल्यारों की टोलियां घर घर जाकर ढोल और झांझर की थाप पर विभिन्न प्रकार की होलियों का गायन कर रही हैं, जबकि कुछ स्थानों में निर्धारित स्थल और मंदिरों में खड़ी होली का गायन किया जा रहा है।
होल्यारों की टोलियां ओ तेरे नैन रसीले यार, बालम प्रीत लगा ले नैनों से, सुमिरो सीता राम भया कोई हीरा जनम नहीं पाओगे, ओ मोहन नंदलाल बरसाने वन आए, तेरी तपस्या होय कुंवर भागीरथ गंगा ले आए, जै बोलो जशोदा नंदन की, नदी यमुना के तीर कदम चढ़ि कान्हा बजा गयो बांसुरिया, ऐसी चातुर नार श्रवण मारो छ, तल धरती पुर बादल, बादल उपजी बयार आदि बोलों के साथ एक घर के आंगन से दूसरे घर के आंगन में जा रही हैं।
जिला मुख्यालय के अलावा त्यारकूड़ा, तल्ली मादली, छतार, कुलेठी, डड़ा, ढकना बडोला, चक्कू, डूंगरासेठी, देवलनाद, खर्ककार्की, पवेत, बाजरीकोट, सिमल्टा, मुडियानी, फुलारागांव, शक्तिपुर बुंगा, कनलगांव के अलावा सिप्टी, सैंदर्क, अमकडिय़ा, ओखलढूंगा, बूढाखेत, पाली, घुरचुम, अमोड़ी, बडोली, सूखीढांग आदि क्षेत्रों में भी होली का आयोजन किया जा रहा है। खर्ककार्की में राम लाल, मोहन कार्की, अनिल कार्की, गुड्डू कार्की, सिप्टी क्षेत्र में श्याम सिंह, कुंदन सिंह, चंद्रशेखर, ज्वाला दत्त, मुकेश कुमार सहित होली गायन में जुटे हुए हैं।