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राजनीति ने लगाया रंग महोत्सव पर ब्रेक

Sun, 12 Mar 2017 10:04 PM IST
नवल जोशी/अमर उजाला, लोहाघाट (चंपावत)
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लोहाघाट में होली महोत्सव में खड़ी होली का गायन करते होल्यार। - फोटो : अमर उजाला
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कुमाऊं में गाई जाने वाली खड़ी होलियों में लोहाघाट की खड़ी होली का खास मुकाम है। खड़ी होली को समय के हिसाब से पहचान देने के लिए चार वर्ष पूर्व से रामलीला मैदान में रंग महोत्सव शुरू हुआ, लेकिन इस बार यह रंग महोत्सव सियासत की भेंट चढ़ गया। विधानसभा चुनाव के नतीजे होली से दो दिन पूर्व आने से सियासी सरगर्मी के चलते रंग महोत्सव को स्थगित कर दिया गया है।
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राजनीतिक सरगर्मियों का असर अब यहां की लोक संस्कृति पर भी पड़ रहा है। श्री राम सेवा सांस्कृतिक रामलीला कमेटी ने काली कुमाऊं की विशिष्ट खड़ी होली के संरक्षण और संवर्द्धन के मकसद से 2013 से होली रंग महोत्सव का आयोजन किया। महोत्सव न होने से होली प्रेमी मायूस हैं।

विधानसभा चुनाव के 11 मार्च को होने वाले मतगणना ने रंग महोत्सव पर ब्रेक लगा दिया है। राजनीतिक हलचलों के चलते इस महोत्सव को न करने का निर्णय लिया गया। अलबत्ता अगले साल से इसे फिर से शुरू करने की आयोजकों ने बात कही है। इस महोत्सव से सुंई खैसकांडे, पउ, फोर्ती, चौड़ी, कलीगांव, डैंसली, रायकोट, कनेड़ी, कोयाटी, ठांटा, दिगालीचौड़ी, मउ, पम्दा, बाराकोट सहित जिले के दूरदराज की 20 से ज्यादा होली टीमें अपनी छाप छोड़ती थी। प्रतिभाओं को मौका भी मिलता था। इसी के चलते कम समय में इस महोत्सव को भारी प्रसिद्धि मिली।
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2015 में महोत्सव में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी हिस्सा लिया। अनुशासन के साथ शालीनता और होली की पोशाकों में रहते हुए चयनित होने वाली विभिन्न क्षेत्रों की होली टीमों द्वारा शानदार होली गीतों का गायन कर श्रोताओं का खूब मनोरंजन किया। वर्षभर होली रंग महोत्सव का बेसब्री के साथ इंतजार करने वाले होल्यारों को अपनी प्रतिभा को इस बार न दिखा पाने का खूब मलाल है।

अगले साल करनी होगी अतिरिक्त मेहनत
बाराकोट विकासखंड के पम्दा गांव से महोत्सव में होली टीम लाने वाले होल्यार नगेंद्र कुमार जोशी का कहना है कि महोत्सव को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों के होल्यारों में काफी उत्साह रहता था। होली के एक माह पहले से ही होल्यार महोत्सव में प्रस्तुत करने वाली होली के गायन में जुट जाते थे। अगली बार फिर से सबको शामिल करने में अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ेगी।

इस बार गांवों में करेंगे होली
सुंई के प्रमुख होल्यार राजेश चौबे का कहना था कि होली रंग महोत्सव के चलते क्षेत्र की खड़ी होली का नाम दूर-दूर तक फैला है। महोत्सव में भाग लेने के लिए बुजुर्गों से लेकर बच्चों तक में काफी उत्साह होता है। इस वर्ष रंग महोत्सव न होने से गांव में ही कार्यक्रम होगा।
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