सामरिक महत्व के टनकपुर-जौलजीबी (टीजे) मोटर मार्ग पर लंबे समय से बने गतिरोध के टूटने के आसार बन गए हैं। फिलहाल इस मार्ग को ठुलीगाड़ से रुपालीगाड़ तक बनाने की कोशिश की जा रही है।
इसके लिए संशोधित डिटेल प्रोगेस रिपोर्ट (डीपीआर) भेजी जाएगी। यह डीपीआर 15 दिनों के भीतर भारत सरकार को भेजी जानी है। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा 28 जनवरी को आयोजित विभिन्न पक्षों की उच्च स्तरीय बैठक में यह निर्देश जारी किए गए हैं।
टीजे मोटर मार्ग में वन अनापत्ति सहित तमाम अड़चनें फरवरी 2014 में पूरी कर ली गई थीं। मूल डीपीआर में 134.57 किमी लंबी टीजे रोड का निर्माण 733 करोड़ रुपये में होना था। प्रस्तावित रोड टनकपुर से ठुलीगाड़, चूका, तामली, पंचेश्वर, झूलाघाट, अस्कोट होते हुए जौलजीबी तक बननी थी।
लेकिन नई केंद्र सरकार ने भारत-नेपाल सीमा पर प्रस्तावित पंचेश्वर बांध को अपनी शीर्ष प्राथमिकता में शामिल किया। बांध की ऊंचाई के बढ़ने की संभावना की वजह से इस रोड का काफी हिस्सा डूब क्षेत्र में आने की आशंका है। इसके चलते रोड के एलाइंमेंट (समरेखन) पर तलवार लटकी रही। नए एलाइंमेंट की वजह से काम को गति नहीं मिल सकी।
टीजे रोड के नोडल अधिकारी लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता बीसी पंत का कहना है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा इस संबंध में 28 जनवरी को दिल्ली में संबंधित पक्षों की बैठक में ठुलीगाड़ से रुपालीगाड़ तक के 43 किलोमीटर तक के मोटर मार्ग के लिए अलग डीपीआर को हरी झंडी दे दी गई।
नई डीपीआर को भारत सरकार के स्तर पर ही संशोधित किया जाएगा। इस मार्ग पर आने वाले इलाके पंचेश्वर बांध के डूब क्षेत्र से बाहर हैं। देहरादून में सोमवार को हुई बैठक में रुपालीगाड़ तक के हिस्से की डीपीआर को दो सप्ताह में तैयार कर लोनिवि को देने को बीएलजी कंस्टलेंसी प्राइवेट लिमिटेड को कहा गया है।
इसके अलावा वन अनापत्ति मामले की भी समीक्षा की जाएगी। अलबत्ता रुपालीगाड़ से जौलीजीबी की तरफ के हिस्से का काम पंचेश्वर बांध की तस्वीर फाइनल होने पर हो सकेगा।
टीजे के शुरुआती हिस्से में चल रहा है काम
रोड के शुरुआती हिस्से ककरालीगेट-ठुलीगाड़ का काम चल रहा है। टनकपुर के एसडीएम नरेश दुर्गापाल का कहना है कि 12 किलोमीटर के इस शुरुआती हिस्से को डबल लेन किया जा रहा है। इसके लिए रोड कटिंग, पेड़ और बिजली के पोलों को हटाने का काम चल रहा है। मोटर मार्ग की साढ़े सात मीटर की चौड़ाई को 12 मीटर किया जाएगा।
विकास से ज्यादा सुरक्षा को जरूरी है रोड
काली नदी के किनारे बनने वाली इस रोड के आड़े आ रहे वन क्षेत्र के बदले दो साल पूर्व पिथौरागढ़ जिले के रांथी, सोसा, रमतोली, पांगला और गलाती में 213 हेक्टेयर एरिया में क्षतिपूरक पौधरोपण को फाइनल किया गया।
यह मोटर मार्ग सिर्फ सीमांत के गांवों के विकास को ही पंख नहीं लगाएगा, बल्कि सीमा की सुरक्षा को भी बेहतर करेगा। डीएम दीपेंद्र कुमार चौधरी का कहना है कि सीमा से गुजरने के चलते यह रोड सुरक्षा के लिए खासी महत्वपूर्ण है और सीमा पर चौकसी को बेहतर आधारभूत ढांचा तैयार करने में सहायक होगी।
सीमा सुरक्षा के लिए इस मार्ग में एसएसबी की 34 बॉर्डर आउटपोस्ट में से 31 तक पहुंचने को रोड नहीं है। इस वजह से यहां जरूरी सामग्री को पहुंचाने में देरी और लागत भी ज्यादा आती है।