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लैब बगैर प्रैक्टिकल देंगे छात्र

Thu, 04 Feb 2016 10:32 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत
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उत्तराखंड बोर्ड का इम्तिहान देने वाले छात्र-छात्राएं इस माह विज्ञान (भौतिक विज्ञान, जीव विज्ञान, रसायन विज्ञान) विषयों की प्रायोगिक परीक्षाएं देंगे। मगर अधिकांश स्कूलों में छात्र-छात्राओं की प्रायोगिक तैयारी का पुख्ता बंदोबस्त नहीं है। ज्यादातर स्कूलों में प्रयोगशाला का आधारभूत ढांचा ठीक नहीं है। नए खुले स्कूलों की तस्वीर तो और भी खराब है।
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जिले में 57 राजकीय इंटर कॉलेज और 47 हाईस्कूल हैं। इक्का-दुक्का स्कूलों को छोड़ सभी स्कूलों में विज्ञान विषय है। अतिथि शिक्षकों की बदौलत अगस्त 2015 से विज्ञान शिक्षकों की कमी को तो अधिकांश जगह दूर कर लिया गया। लेकिन प्रयोगशालाओं के हाल कतई ठीक नहीं हैं। बमुश्किल 55 प्रतिशत स्कूलों में ही विज्ञान की प्रयोगशाला है। इनमें से भी कुछ स्कूलों की लैब तो बस नाम भर की है। प्रायोगिक ज्ञान देने की कायदे की व्यवस्था नहीं होने से प्रायोगिक परीक्षा में छात्र-छात्राओं को दिक्कतें होती है। जिले में इंटरमीडिएट के 4035 बोर्ड परीक्षार्थियों में से करीब 55 प्रतिशत छात्र विज्ञान वर्ग के हैं। विज्ञान प्रयोगशाला की कमी इन छात्रों के लिए चुनौती बन रही है। फिलहाल चंपावत, टनकपुर, लोहाघाट समेत बमुश्किल छह जगहों पर ही लैब उपलब्ध है। अलबत्ता अब नई लैब के लिए पहल की जा रही है।

पुराने जीआईसी में प्रयोगशालाएं ठीक हाल में हैं। अलबत्ता कुछ वर्ष पूर्व हाईस्कूल से उच्चीकृत हुए जीआईसी में लैब मानकों के अनुरूप नहीं है। अलबत्ता भवन निर्माण के साथ प्रयोगशाला भवन भी प्रस्तावित किए गए हैं। अगले कुछ वर्षों में लैब की व्यवस्था ठीक कर ली जाएगी। राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत 68 प्रयोगशाला सहायक आउटसोर्स किए गए हैं। -दिलेर सिंह चौहान, डीईओ (माध्यमिक), चंपावत।
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ठीक हाल में हैं मुख्यालय के लैब
जिले में विज्ञान प्रयोगशालाओं की स्थिति में बेशक सुधार की बहुत जरूरत है, लेकिन जिला मुख्यालय के दोनों विद्यालयों की प्रयोगशाला ठीकठाक है। जीआईसी और जीजीआईसी की लैब में सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
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