पिता द्वारा घर से निकाले गए मासूम दीपक को रीड्स संस्था ने नेपाल पुलिस की मौजूदगी में माता-पिता की काउंसलिंग कर उनके सुपुर्द कर दिया है। नेपाल पुलिस ने पिता को दोबारा बच्चे के साथ ऐसा व्यवहार किए जाने पर कार्रवाई की भी हिदायत दी है।
नेपाल के महेंद्र नगर गोबरिया वार्ड संख्या 18 निवासी हजारी भट्ट ने कक्षा पांच में पढ़ने वाले अपने 12 वर्षीय बेटे दीपक को सिर्फ इसलिए घर ने निकाल दिया था कि वह स्कूल के मासिक टेस्ट में कम नंबर लाया था। भट्ट ने दीपक की पहले पिटाई की और फिर उसे भारत-नेपाल बार्डर में घर वापस न आने की हिदायत देकर छोड़ दिया था। डरा-सहमा दीपक भूखा रहकर तीन दिन तक ठंड में शारदा के खनन क्षेत्र में बने गड्ढों में छिपा रहा। भूख और ठंड से उसे खूनी पेचिस भी होने लगी थी।
खनन कारोबारी भुवन कश्यप की नजर में आए मासूम दीपक को रीड्स संस्था के सुपुर्द किया गया था। संस्था के सचिव भुवन गड़कोटी ने बताया कि सूचना पर गड्डाचौकी (नेपाल) थाने के इंचार्ज राजेंद्र भंडारी दीपक के माता-पिता को लेकर बनबसा पहुंचे। माता-पिता की काउंसलिंग करने के बाद दीपक को उनके सुपुर्द कर दिया है।