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अभियान:स्टेडियम बना नहीं, बस एलानभर हुआ

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चंपावत में स्टेडियम नहीं होने से जीआईसी के गोरलचौड़ मैदान में होती है खेल गतिविधियां। - फोटो : CHAMPAWAT
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चंपावत। राज्य बनने के 19 साल बाद भी चंपावत का स्टेडियम का सपना हकीकत से दूर है। तीन मुख्यमंत्रियों के एलान के बावजूद स्टेडियम बनाने की दिशा में एक कदम आगे नहीं बढ़ा जा सका है। इसकी सबसे बड़ी वजह भूमि का न मिल पाना है।
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जिले में एकमात्र स्टेडियम उप्र के दौर में टनकपुर में 1998 में बना था। चंपावत में स्टेडियम का एलान तीन मुख्यमंत्रियों ने किया, लेकिन ये घोषणा जमीन पर नहीं उतर सकी। पहले सीएम नित्यानंद स्वामी ने 2001 में, जनरल बीसी खंडूरी ने 2008 और डा. रमेश पोखरियाल ने 2011 में चंपावत दौरे में स्टेडियम का सार्वजनिक एलान किया था। लेकिन स्टेडियम के लिए निशुल्क भूमि नहीं मिलने से काम शुरू ही नहीं हो सका। इसकी वजह से खेल गतिविधियां जीआईसी के गोरलचौड़ मैदान में करनी पड़ती है। जिला क्रीड़ाधिकारी आरएस धामी का कहना है कि स्टेडियम के लिए जमीन नहीं मिल पा रही है। जिस कारण दिक्कतें आ रही है।
कोट
चंपावत में स्टेडियम नहीं होने से खेलों के कैंपों से लेकर प्रतियोगिताएं नहीं हो पा रही हैं। खेल गतिविधियां जीआईसी के गोरलचौड़ मैदान में करना मजबूरी बन रहा है।
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दिग्विजय कार्की।
जिला मुख्यालय में तीन-तीन मुख्यमंत्रियों के एलान के बावजूद स्टेडियम नहीं बन पाना कमजोर राजनीतिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इससे खेल और खिलाड़ियों को नुकसान हो रहा है।
सुनील गड़कोटी।
चंपावत में स्टेडियम का निर्माण हर हाल में होगा। इसके लिए भूमि और बजट की कमी आड़े नहीं आने दी जाएगी। खेल विभाग को उपयुक्त जमीन तलाश करने को कहा गया है।
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कैलाश गहतोड़ी,
विधायक, चंपावत।
कोट
चंपावत में स्टेडियम निर्माण की सबसे बड़ी अड़चन जमीन का न मिल पाना है। इसके लिए खेल और राजस्व विभाग को भूमि की खोज करने के लिए कहा गया है।
सुरेंद्र नारायण पांडेय,
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