चंपावत में गोरलचौड़ क्षेत्र से लगी सेना की जमीन में लगे साइनबोर्ड। संवाद न्यूज एजेंसी
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चंपावत। चंद राजाओं की राजधानी रहे चंपावत में स्टेडियम बनने का सपना अब शायद ही पूरा हो सके। मुख्यालय में गोरलचौड़ मैदान को विस्तार दे स्टेडियम बनाए जाने की कवायद को तगड़ा झटका लगा है। मैदान से लगी सेना की जमीन की अदला-बदली के प्रयासा तो नाकाम रहे ही और अब मैदान के नजदीक सेना ने अपनी स्वामित्व वाली जमीन पर बाकायदा साइनबोर्ड लगा दिए हैं।
चंपावत में स्टेडियम की कवायद 2011 से शुरू हुई। तब तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने एलान किया था, लेकिन जमीन नहीं मिलने से ये घोषणा जमीनी रूप नहीं ले सकी। जमीन नहीं मिलने के बाद गोरलचौड़ मैदान को विस्तार देकर स्टेडियम बनाने का प्रस्ताव रखा गया। इसके लिए मैदान के आसपास की सेना की 77 नाली जमीन को खेल विभाग को हस्तांतरित करने की कवायद की गई। इसके लिए खेल विभाग और प्रशासन ने जमीन की अदला-बदली की कोशिश की। सेना के अफसरों से बात कर गोरलचौड़ मैदान के पास की जमीन के बदले जूप पटवा में राजस्व विभाग की इतनी ही जमीन देने का प्रस्ताव भी रखा गया लेकिन यह मामला भी बेनतीजा रहा। अब सेना की ओर से मैदान से लगी अपनी जमीन पर सेना के स्वामित्व के साइनबोर्ड लगा दिए गए हैं। इससे माना जा रहा है कि अब इस जमीन के खेल विभाग को मिलने के रास्ते बंद हो गए हैं।
तीन मुख्यमंत्रियों का एक वादा नहीं हो पा रहा पूरा
चंपावत। उत्तराखंड राज्य बनने के बाद से अभी तक चंपावत जिले में एक भी नया स्टेडियम नहीं बन सका है। लोहाघाट में छमनियाचौड़ में निर्माणाधीन स्टेडियम के पूरा होने में अभी समय लगेगा। चंपावत में स्टेडियम का एलान तीन मुख्यमंत्रियों ने किया, लेकिन ये घोषणा अधूरी रही। डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक के अलावा मेजर जनरल बीसी खंडूरी और हरीश रावत ने भी मुख्यमंत्री रहते स्टेडियम बनाने का एलान किया लेकिन स्टेडियम का सपना दूर-दूर तक पूरा होता नहीं दिख रहा है।
200 नाली जमीन एक जगह पर नहीं मिलने से चंपावत में स्टेडियम नहीं बन पा रहा है। गोरलचौड़ मैदान से लगी सेना की 77 नाली जमीन के हस्तांतरण का प्रयास किया गया। सेना को जूप पटवा पर जमीन देने का प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन मामला किसी नतीजे तक नहीं पहुंच सका। और गोरलचौड़ मैदान के पास अपनी जमीन पर अब सेना ने साइनबोर्ड लगा दिए हैं। - आरएस धामी, जिला क्रीड़ाधिकारी, चंपावत।