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वीरचक्र विजेता फौजी की इंसाफ की जंग

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वीरचक्र विजेता चंद्री चंद। (फाइल फोटो) - फोटो : CHAMPAWAT
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फौज, अर्द्ध सुरक्षा बलों के जवानों की शहादत पर जज्बात का सैलाब उमड़ता है। ऐसे मौकों पर भावनाओं का उफान लाजमी भी है लेकिन देश की सरहद के रखवालों के प्रति सामान्य वक्त में जिम्मेदारी से मुंह मोड़ने के मामले भी कम नहीं है। चंपावत जिले में वीरचक्र विजेता सैनिक स्वर्गीय चंद्री चंद के मामले में ऐसा ही हो रहा है।
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1950 में पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की ओर से वीरचक्र से नवाजे गए चंद्री चंद को इनाम में दी गई जमीन पर सरकार आज तक कब्जा नहीं दिलवा सकी है। सीमा की जंग में बहादुरी दिखाने वाले चंद इनाम की जमीन को जीते जी हासिल नहीं कर सके। अब इस जमीन की जंग उनके बेटे किशन चंद लड़ रहे हैं।
टनकपुर के आमबाग गांव के सूबेदार चंद्री चंद ने आजादी के तुरंत बाद 1948 में पाकिस्तान की ओर से किए गए कबाइल हमले में असाधारण वीरता दिखाई थी। इस पराक्रम के लिए उन्हें वीरचक्र मिला। 1978 में प्रदेश सरकार ने यूएस नगर जिले के बिल्हैड़ी गांव में 20 बीघा जमीन भी इनाम में दी।
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भूमि के दस्तावेज भी मिले लेकिन जमीन पर कुछ दबंगों की ओर से किए गए कब्जों को नहीं छुड़ाया जा सका। 2007 में अंतिम सांस लेने से पूर्व तक वह पुरस्कार की इस जमीन के लिए आवाज उठाते रहे। सरहद की जंग का विजेता जमीन की जंग नहीं जीत सका।
सीएम पोर्टल में शिकायत के बाद सत्याग्रह करेंगे किशन
चंपावत। फौजी चंद्री चंद के किसान बेटे किशन चंद बताते हैं कि जमीन के दस्तावेज तो उनके पास हैं लेकिन भूमि पर कुछ दबंगों ने कब्जा किया है। जमीन पाने के लिए एसडीएम से लेकर राष्ट्रपति तक चंद्री चंद लगातार गुहार लगाते रहे। चार साल पूर्व तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने चंपावत जिले में जगह तलाश कर जमीन आवंटन करने का एलान भी किया लेकिन ये घोषणा भी आगे नहीं बढ़ सकी।
अब किशन चंद ने इस मामले को मुख्यमंत्री पोर्टल पर उठाने का एलान करते हुए फिर भी इंसाफ न मिलने पर सत्याग्रह करने की बात कही है। पांच लोगों के परिवार वाले किशन चंद की माली हालत भी ठीक नहीं है। खेती ही रोजगार का इकलौता जरिया है।
छोटा बेटा अब भी फौज में कर रहा सेवा
चंपावत। वीरचक्र विजेता चंद्री चंद का परिवार इंसाफ की जंग लड़ रहा है। वहीं उनके परिवार में फौज में जाने का जुनून अब भी कम नहीं है। चंद्री चंद का दूसरा बेटा राजेंद्र चंद अब भी सेना में है। इस वक्त वह दिल्ली में तैनात हैं।
पुरस्कार के रूप में भूमि दिए जाने का मामला काफी पुराना है। इस पूरे मामले की पत्रावली का अध्ययन कर फौजी परिवार को इंसाफ दिलाए जाने का प्रयास किया जाएगा। इस संबंध में शासन से भी जरूरी निर्देश लिए जाएंगे। सुरेंद्र नारायण पांडेय, डीएम।

चंपावत के वीरचक्र विजेता चंद्री चंद के बेटे किशन चंद।- फोटो : CHAMPAWAT

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