नेपाल सीमा से लगे चंपावत जिले में सुविधाओं का अकाल है। रेल मार्ग है नहीं, आवाजाही का जरिया सिर्फ रोड मार्ग से है। यहां तक कि आपदा और दूसरे संकट में भी आवाजाही की परेशानियां भी मुंह बाएं रहती थी, मगर साल 2015 ने हवाई राह खोली है। इस साल चंपावत जिले में हेलीपेड की उम्मीद बढ़ी है। इस दिशा में काम शुरू हो गया है।
सितंबर 1997 में स्थापित चंपावत जिले में अब तक एक भी हेलीपेड नहीं है। लंबे समय से इसकी कवायद चल रही थी। पहली बार 2015 में हेलीपेड को हरी झंडी मिली है। प्रभारी जिलाधिकारी जेएस राठौर के मुताबिक सर्किट हाउस के पास हेलीपेड निर्माण का काम पिछले महीने से शुरू हो गया। इसके लिए सेलाखोला के नजदीक की जमीन का समतलीकरण किया जा रहा है। 0.20 हेक्टेयर जमीन पर यह हेलीपेड बनेगा।
हेलीपेड में 2 चौपड़ और 1 एम-17 हवाई जहाज एक साथ उतर सकेंगे। इस हेलीपेड के बनने से जिले में राजकीय अतिथियों की आवाजाही, आपदा और अन्य मौकों पर हेलीकॉप्टर को उतारने की सुविधा मिल सकेगी। अगले साल के शुरू में यह हेलीपेड बनकर तैयार हो जाएगा। बहरहाल इस वक्त हेलीकॉप्टर को गोरलचौड़ मैदान में उतारा जाता है।