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कहीं विरासत पर सियासत, तो कहीं विरासत पर मूंदे हैं आंखें

Sun, 22 Oct 2017 10:09 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, चंपावत।
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बुरे हाल में है स्वामी विवेकानंद की याद को सहेजा दियूरी का डाकबंगला। - फोटो : अमर उजाला
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 एक तरफ देश में ताज महल सहित कई जगह विरासत पर सियासत हो रही है। वहीं इस जिले में विरासत को लेकर उदासीनता का आलम है। 1893 में शिकागो धर्म सम्मेलन के जरिये सात समुंदर पार आध्यात्मिक पताका फहराने वाले महापुरुष स्वामी विवेकानंद का दुनिया भर में डंका है। लेकिन इस जिले में उनकी विरासत से जुड़े स्थानों और इमारतों की अनदेखी हो रही है। दियूरी के पास उनकी स्मृतियों को सहेजने वाले डाकबंगले का भी कोई खैर ख्वाह नहीं है। यह बंगला अब पूरी तरह वीरान पड़ा है। यहां तक कि इसकी देखरेख के लिए एक अदद चौकीदार भी नहीं है।  
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शिकागो में हिंदू धर्म की ध्वज पताका फहराने वाले स्वामी जी का चंपावत से खास संबंध रहा है। उनकी स्मृति से जुड़ा एक बंगला मुख्यालय से करीब 25 किमी दूर दियूरी में है। दियूरी के इस बंगले में विवेकानंद 19 जनवरी 1901 को रुके थे। उनके साथ गुरु भाई और श्रीरामकृष्ण देव के दूसरे शिष्य स्वामी सदानंद तथा स्वामी विरजानंद के अलावा अल्मोड़ा के लाला गोविंद लाल शाह भी थे।  

अद्वैत आश्रम मायावती के मुताबिक चंपावत से डोली के जरिए स्वामी जी दियूरी पहुंचे थे। डाकबंगले में स्वामी जी और उनके साथियों ने घी और भात खाया। दियूरी के ग्रामीण नंदाबल्लभ, मोहन राम, जोहर सिंह आदि बुजुर्गों का कहना है कि दूयरी के बंगले में स्वामी जी ने रात बिताई थी। मगर दो कमरे वाले इस बंगले के हाल बेहद खराब है। देखरेख का कोई इंतजाम नहीं है। भवन की हालत इस लायक नहीं है कि कोई इसमें रह सके।  
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कभी पैदल यात्रियों का पड़ाव भी रहा 
टनकपुर-अस्कोट पैदल मार्ग पर स्थित दियूरी डाकबंगले पर जिला पंचायत का स्वामित्व है। 18वीं सदी के आखिर में बना यह बंगला कभी पैदल यात्रियों का अहम पड़ाव भी होता था। लेकिन इस बंगले को संवारने के लिए उसकी ओर से कोई पहल नहीं की गई है। तीन दशक से यह रखरखाव के अभाव में है। जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी राजेश कुमार का कहना है कि पंचायत ने इसके रखरखाव में कभी धन नहीं खर्च किया।  
कोट  
आध्यात्मिक प्रेरणा स्रोत स्वामी विवेकानंद की स्मृति से जुड़े इस स्थान को लेकर लेकर फिलहाल कोई कदम नहीं उठाया गया है। पर्यटन विभाग इस स्थान को लेकर कार्ययोजना तैयार कर प्रस्तावित करेगा। 
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लता बिष्ट,  
जिला पर्यटन विकास अधिकारी,  
चंपावत।
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