चंपावत। जिला अस्पताल में चर्म रोगियों को छह माह तक इलाज नहीं मिल पाएगा। अस्पताल की एकमात्र चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. कणिका पंत छह माह के मातृत्व अवकाश पर चली गई हैं। ऐसे में मरीजों को चर्म संबंधी बीमारियों के लिए बाहर की दौड़ लगानी पड़ेगी।
एकमात्र चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. कणिका पंत के अवकाश पर जाने से जिले की दो लाख की आबादी का चर्म संबंधी इलाज नहीं हो सकेगा। इसके लिए चंपावत, लोहाघाट आदि क्षेत्र के लोगों को 75 किमी दूर पिथौरागढ़ या फिर हल्द्वानी, खटीमा की दौड़ लगानी पड़ेगी। अस्पताल में चर्म रोग विशेषज्ञ के कक्ष के बाहर अवकाश की सूचना भी चस्पा नहीं की गई है। ऐसे में लोग यहां पर आकर पूछताछ कर रहे हैं।
मौसम परिवर्तन के चलते एलर्जी का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में मरीजों के लिए बिना चर्म रोग विशेषज्ञ के अपने शरीर पर पूरा ध्यान देना होगा। कुछ लोग चर्म संबंधी बीमारियों का इलाज फिजिशियन से करा रहे हैं। सीएमओ डॉ. केके अग्रवाल ने कहा कि चर्म रोग विशेषज्ञ छह माह के मातृत्व अवकाश पर हैं। अन्य कोई वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं है। उनके आने के बाद ही मरीजों का उपचार संभव हो सकेगा।