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निपुण निर्बल संस्था नेपाली बच्चों के लिए सहारा बनी

Thu, 28 Sep 2017 10:56 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, लोहाघाट (चंपावत)।
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नेपाल मूल के बच्चों को लोहाघाट के आदर्श प्राथमिक विद्यालय में दाखिला दिलाते विपिन। - फोटो : अमर उजाला
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निपुण निर्बल संस्था पारिवारिक दिक्कतों के चलते स्कूल नहीं जा पा रहे नेपाल मूल के तीन मासूम बच्चों के लिए वरदान साबित हुई। संस्था के अध्यक्ष के अध्यक्ष विपिन गोर्खा ने इन तीनों बच्चों आदर्श राजकीय प्राथमिक विद्यालय लोहाघाट में प्रवेश दिलाया है। 
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मूल रूप से नेपाल निवासी हर सिंह बोहरा अपने बच्चों के साथ लोहाघाट में रहकर मिस्त्री का कार्य करते हैं। आर्थिक तंगी के कारण वह अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेज पा रहे थे। निपुण निर्बल संस्था के अध्यक्ष विपिन गोर्खा का कहना है कि उनके द्वारा हर सिंह की बेटी मालती (8), संगीता (6) और उनके बेटे सुरेश बोहरा (4) से उनके स्कूल न जाने कारण पूछा, तो उनके द्वारा परिवार की स्थिति ठीक न होने की बात बताई गई। इसके चलते विपिन ने बच्चों के पिता हर सिंह से बात की। काफी समझाने के बाद वह अपने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए राजी हो गया। 

प्रधानाध्यापक प्रदीप कर्नाटक ने भी इस काम में सहयोग किया। जिसके बाद बच्चों की मां रेखा बोहरा को साथ लेकर विपिन ने तीनों बच्चों का स्कूल में दाखिला कराया। स्कूल में दाखिला होने के बाद बच्चों की खुशी का  ठिकाना नहीं था। उन्होंने कहा कि उनका मन भी अन्य बच्चों की तरह स्कूल जाने के लिए करता था।  लेकिन पारिवारिक दिक्कतों के चलते वे स्कूल नहीं जा पा रहे थे। स्कूल में प्रवेश मिलने के बाद बच्चों और उनके माता पिता ने विपिन और प्रधानाध्यापक प्रदीप कर्नाटक का आभार जताया। 
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निर्धन कन्या की शिक्षा का किया इंतजाम
बनबसा (चंपावत)। फैजाने औलिया मजलूम परवरिश तालीम समिति ने एक निर्धन कन्या की शिक्षा का जिम्मा लेकर बेटी बचाव, बेटी पढ़ाओ अभियान को सार्थक किया है। समिति अध्यक्ष नदीम ने बताया कि बनबसा निवासी प्रियंका पुत्री स्व. अनिल कश्यप की शिक्षा का पूरा जिम्मा समिति ने उठाया है। बताया कि उक्त किशोरी के पिता का करीब छह वर्ष पूर्व निधन हो गया था। जिसके बाद इसकी पढ़ाई बंद हो गई। मां के साथ लोगों के घरों में काम कर जीवन यापन कर रही थी। समिति ने एक स्थानीय स्कूल में कक्षा सातवीं में उसका प्रवेश कराया है। समिति अध्यक्ष ने बताया कि उक्त कन्या की पूरी शिक्षा का खर्च समिति वहन करेगी।
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