चंपावत। नेपाल सीमा से लगे तल्लादेश मंच के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) को बुधवार को अपना भवन मिल गया। 195.47 लाख रुपये से बने इस भवन का तल्लादेश के मंच गांव से 107 किमी दूर टनकपुर में बुधवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लोकार्पण किया लेकिन भवन होने के बावजूद इस आईटीआई में प्रशिक्षण लेने के लिए कोई भी छात्र नहीं होगा। इसकी वजह यहां के आईटीआई में दिसंबर 2017 से लटके ताले हैं।
सितंबर 2015 में खुला तल्लादेश मंच का आईटीआई दिसंबर 2017 से बंद है। इलेक्ट्रीशियन, मशीनिष्ट और कोपा (कंप्यूटर ऑफ प्रोग्रामिंग एप्लीकेशन) ट्रेड मंजूर थे लेकिन किराये के भवन में भी यहां इलेक्ट्रीशियन का मात्र एक ट्रेड ही चला। आईटीआई में ताला लटकने से यहां के स्टाफ को दूसरी जगह संबद्ध कर दिया गया।
राहुल सिंह, उदय सिंह आदि ग्रामीणों का कहना है कि इस आईटीआई से उम्मीद तो थी कि तल्लादेश क्षेत्र के नौजवानों को अपने गांव के पास रोजगारपरक प्रशिक्षण मिल सकेगा लेकिन 46 महीने से बंद होने की वजह से इसका लाभ नहीं मिल सका।
जिले में तल्लादेश समेत बाराकोट, दिगालीचौड़, भिंगराड़ा, बनबसा, रेगड़ू के भी छह आईटीआई बंद हो चुके हैं। उधर टनकपुर आईटीआई की निदेशक स्मिता अग्रवाल का कहना है कि निदेशालय से जारी निर्देशों के बाद से प्रवेश प्रक्रिया बंद है। अगले निर्देश के अनुरूप जरूरी कार्यवाही की जाएगी।
एनसीवीटी से संबद्ध न होने के कारण बंद हैं प्रवेश
चंपावत। जिले के नौ औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान में से केवल टनकपुर, चंपावत, खेतीखान के ही सिर्फ तीन आईटीआई नेशनल काउंसिल ऑफ वोकेशनल ट्रेनिंग (एनसीवीटी) से मान्यता प्राप्त हैं।
इन तीन संस्थाओं के पास भवन, स्टाफ सहित अन्य जरूरी आधारभूत ढांचा है जबकि शेष छह संस्थान स्टेट काउंसिल ऑफ वोकेशनल ट्रेनिंग (एससीवीटी) से संबद्ध हैं। इस वजह से ये छह आईटीआई तीन साल से अधिक समय से बंद हैं।