बनबसा के चिश्चिमी छोर पर यूकेलिस्टिक का प्लांटेशन जहां कभी आबाद था कठुवापाती गांव।
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बनबसा (चंपावत)। क्षेत्र के गैरआबाद गांव कठुवापाती में सिडकुल स्थापना के लिए दोबारा प्रयास शुरू हो गए हैं। गैरआबाद गांव कठुवापाती में सिडकुल स्थापना से क्षेत्र का विकास, रोजगार, व्यवसाय भी बढ़ने की उम्मीद है।
नगर के पश्चिमी छोर पर बहने वाली हुड्डीनदी तट पर बसे आनंदपुर गांव के सामने नदी के पश्चिमी छोर पर गैरआबाद गांव कठुवापाती है। विधायक कैलाश गहतोड़ी ने कठुवापाती में सिडकुल स्थापना के लिए विधानसभा में प्रश्न उठाया था। वर्ष 2017 में यहां आए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कठुवापाती में सिडकुल स्थापित करने की घोषणा की थी। टनकपुर के एसडीएम हिमांशु कफल्टिया बताते हैं कि राजस्व मानचित्रों में कठुवापाती गांव दर्ज है, लेकिन वन विभाग इसे आरक्षित वन क्षेत्र बता रहा है। स्थिति स्पष्ट करने के लिए पुराने मानचित्रों समेत सर्वेक्षण विभाग की मदद ली जा रही है। कठुवापाती में गांव बसे होने के अन्य प्रमाण भी जुटाए जा रहे हैं। पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष और वर्ष 1982 में चंदनी आनंदपुर के ग्राम प्रधान रहे बहादुर सिंह पाटनी के मुताबिक कठुवापाती थारु जनजाति बहुल गांव था। बनबसा के बुजुर्ग भी कठुवापाती में पांच छह दशक पहले तक गांव को आबाद बताते हैं। कठुवापाती वर्ष 1960 तक आबाद था लेकिन सुविधाओं के अभाव और जनसमस्याओं के चलते ग्रामीण पलायन कर गए और वर्ष 1965 में गांव खाली हो गया। इस कारण तीन ओर से वन भूमि से घिरे कठुवापाती की करीब 700 बीघा भूमि पर वर्ष 1970 के दशक में पूर्वी तराई वन प्रभाग ने यूकेलिप्टस लगा दिया।