अमर उजाला ब्यूरो, चंपावत। ये न आगरा है और न ही कानपुर। मगर चंपावत जिले के एक छोटे से गांव में बन रही चप्पलें किसी भी मायने में दोनों औद्योगिक नगरी से कम नहीं है। उद्यमिता की ये पहल चंपावत जिले के एक गांव किस्कोट में शुरू की गई है। यहां के दो भाइयों ने गांव में चप्पल उद्योग शुरू किया है। चंपावत जिले में चप्पल बनाने की यह एकमात्र फैक्ट्री है।
चंपावत जिले की पहचान कभी रोजिन टरपंटाइन फैक्ट्री से होती थी, लेकिन डेढ़ दशक बाद ये सरकारी फैक्टरी भी बंद हो गई। पर इसी जिले के किस्कोट गांव के दो भाइयों (पीतांबर जोशी और बलदेव जोशी) ने पहाड़ में उद्यमिता की साहसिक पहल की है। उन्होंने पिछले साल अक्तूबर में चप्पल बनाने का कारखाना शुरू किया। किस्कोट गांव में लगी यह चंपावत जिले की अकेली चप्पल फैक्टरी है। पीतांबर बताते हैं कि चप्पल के काम का कुछ अनुभव आगरा से लिया। इसके बाद उन्होंने पिछले साल ग्राम उद्योग योजना से मिले दस लाख रुपये से काम शुरू किया। चप्पल बनाने के लिए कच्चा माल दिल्ली और हरियाणा से मंगाया जाता है। अभी इस फैक्ट्री में हर महीने करीब साढ़े सात हजार जोड़ी चप्पल बनाई जा रही हैं, जिससे 30 हजार रुपये से अधिक की आय भी हो रही है। उद्योग विभाग के सहायक महाप्रबंधक ज्ञान प्रकाश दुर्गापाल बताते हैं कि ग्राम उद्योग योजना के जरिए दोनों ग्रामीण उद्यमिता की मिसाल पेश कर रहे हैं।
---:: चंपावत सहित पिथौरागढ़ जिले तक बेच रहे है चप्पल :: पीतांबर जोशी बताते हैं कि तैयार चप्पल फिलहाल चंपावत जिले के विभिन्न नगर और ग्रामीण बाजार में बेची जा रही हैं। शुरू से ही लोग यूके हिल्स नाम से बन रही इन चप्पलों को पसंद कर रहे हैं। अब उनका इरादा इसे पिथौरागढ़, बागेश्वर, अल्मोड़ा जिले तक विस्तार देने की है।
--::: तीन लोगों को मिल रहा रोजगार:: दिसंबर 2019 से शुरू इस फैक्ट्री में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर गांव के कई लोगों को रोजगार मिला है, लेकिन सीधे तौर पर फैक्ट्री में तीन लोगों को रोजगार दिया गया है। पीतांबर जोशी बताते हैं कि अन्य जिलों में कारोबार का विस्तार करने पर और लोगों को भी रोजगार से जोड़ा जा सकेगा।
किस्कोट फैक्ट्री में तैयार चप्पल।
- फोटो : AMAR UJALA
किस्कोट फैक्ट्री में तैयार चप्पल।