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चीन को सबक सिखाने का समय आ गया

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सेना के रिटायर्ड सूबेदार इंदर चंद - फोटो : AMAR UJALA
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राजेश देउपा (संवाद), टनकपुर (चंपावत)। चीन के साथ 1962 का युद्ध लड़ चुके 88 वर्षीय सेना के रिटायर्ड सूबेदार इंदर चंद के अंदर अभी भी चीनी सेना को मुंहतोड़ जवाब देने की हिम्मत है। लद्दाख की गलवां घाटी की घटना ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया है। उनका कहना है कि अब दगाबाज चीन को सबक सिखाने का समय आ गया है। 1962 की तुलना में आज का भारत कई गुना ताकतवर बन चुका है और भारतीन सेना चीन को मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम है। 58 साल पहले चीन के साथ बहादुरी से युद्ध लड़ चुके सूबेदार इंदर चंद तब भारतीय सेना के कोर ऑफ सिग्नल में तैनात थे। उस वक्त सेना ने कम संसाधनों में युद्ध लड़ा था। चीन से लगी कई सीमाओं पर सेना के पास भौगोलिक परिस्थितियों से निपटने के लिए भी पर्याप्त संसाधन नहीं थे, लेकिन फिर भी सैनिकों ने बहादुरी के साथ चीनी सेना का डटकर मुकबला किया था। सेना के पास संचार सुविधा भी बेहतर नहीं थी। वायरलैस और रेडियो रिले के माध्यमों से जैसे-तैसे सूचनाओं का आदान-प्रदान हो पाता था। बताते हैं कि चीन से युद्ध शुरू होते ही उनकी बटालियन ने भी अरूणाचल प्रदेश से लगी सीमा पर मोर्चा संभाल लिया था। नीरारंग जैसे बर्फीले और जटिल मार्गों पर बमडीला, सेराटॉप, प्रतापपुर, सफर, संगरीला क्षेत्र को पार कर सेना मोर्चा लेते हुए वलांग सीमा पर पहुंची थी। सूबेदार चंद कहते हैं कि चीन 1962 वाला भारत समझने की भूल ना करे। आज भारतीय सेना आधुनिक हथियारों व संसाधनों से लैस हैं और चीन का मुकाबला करने में सक्षम है। अब चीन को सबक सिखाने का समय आ गया है। सैन्य ताकत के साथ ही उसकी अर्थव्यवस्था पर चोट पहुंचाकर उसको सबक सिखाया जा सकता है। --::: हिटलर की मंशा से भारतीय सेना के साहस को समझे चीन ::: जर्मनी के तनाशाह हिटलर के कहे शब्दों को याद कर चीन को भारतीय सेना के अदम्य साहस का अनुमान लगा लेना चाहिए। तनाशाह हिटलर ने कहा था कि मेरे पास फ्रांस की तोप, भारत के वीर सैनिक और ब्रिटिश के ऑफिसर होते तो मैं विश्व को आसानी से फतह कर सकता था। "हे ड्रैगन तू नहीं जानता हमें, हम तो वतन के लिए ही जन्मे हैं, हट जा हमारे रास्ते से हम आंधी हैं, तूफान हैं और हिमालय पहाड़ हैं, हमसे जो टकराएगा वह चूर-चूर हो जाएगा। बहकावे में आने वालों तुम भी समझा लो।" -रिटायर्ड कैप्टन, भरत चंद देउपा।
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सेना के रिटायर्ड कैप्टन भरत चंद देउपा - फोटो : AMAR UJALA
सेना के रिटायर्ड कैप्टन भरत चंद देउपा
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