फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बसों में हेल्पर नहीं, स्टाफ के मोबाइल नंबर भी दिखे नहीं

विज्ञापन
टनकपुर में स्कूल बस से जाते बच्चे। संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : TANAKPUR
विज्ञापन
चंपावत। मैदान और पहाड़ से मिलकर बने चंपावत जिले के स्कूली बच्चों के लिए परिवहन सेवाएं एजेंडे से बाहर हैं। बड़ी संख्या में जिले के स्कूलों में बसें उपलब्ध हैं, लेकिन जरूरी सुरक्षा और कई महत्वपूर्ण सुविधाओं के बगैर।
विज्ञापन

नाम न बताने की शर्त पर कुछ अभिभावकों ने बताया कि स्कूल और घर के बीच फासला काफी ज्यादा होने के कारण इन स्कूल बसों में बच्चों को भेजना उनकी मजबूरी है। बस के अलावा उनके पास दूसरा कोई विकल्प नहीं है लेकिन वे बसों में होने वाली असुविधा का भी विरोध नहीं कर सकते हैं। चंपावत जिले में पीले रंग की स्कूली बसें बाहर से जितनी खूबसूरत नजर आ रहीं हैं, भीतर से उतनी हैं नहीं। कई बसों में हेल्पर नहीं हैं। चालक और हेल्पर का नंबर भी 90 प्रतिशत बसों में अंकित नहीं है। हालांकि शहरी क्षेत्रों में अधिकतर जगह ओवरलोडिंग की दिक्कत से निजात अवश्य है।
बाइक में तीन सवार, हेलमेट भी नहीं
चंपावत/टनकपुर। एक ओर स्कूली बसों में लापरवाही, चूक और अनदेखी हो रही है। वहीं सामान्य यातायात व्यवस्था के हाल भी बुरे हैं। चंपावत शहर में राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक बाइक में तीन लोग सवार। इनमें से किसी के भी सिर में हेलमेट नहीं। ऊपर से एक सवार मोबाइल से बात भी कर रहा है। इन सबसे बढ़कर लापरवाही का ये वाकया उस जगह का है, जहां पुलिस की जीप भी खड़ी है।
विज्ञापन

यातायात व्यवस्था में सुधार के लिए पुलिस विभाग अभियान चलाएगा। इसमें परिवहन विभाग का सहयोग भी लिया जाएगा। बाइक सवारों से लेकर तेज रफ्तार और ओवरलोड वाहनों पर कार्रवाई होगी। स्कूली बसों में नियमों के अनुरूप संचालन के लिए शिक्षा विभाग और स्कूल प्रबंधन से बात की जाएगी। फिर भी स्थिति में सुधार न होने पर कार्रवाई की जाएगी। - देवेंद्र पींचा, एसपी, चंपावत।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें