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छात्रवृत्ति घोटाले के दो आरोपी विवेचना अधिकारी के समक्ष हुए पेश, दिए बयान

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बनबसा में फर्जी शिक्षण संस्थान खोलकर 39.52 लाख रुपये के छात्रवृत्ति घोटाले के दो आरोपियों ने एसआईटी के सामने पेश होकर बयान दर्ज कराए। आरोपियों ने मामले की विवेचना में सहयोग देने की बात कही है, जिस पर हाईकोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है।
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कुछ माह पूर्व हाईकोर्ट के आदेश पर जिले में एसआईटी का गठन कर दशमोत्तर के सभी सरकारी और निजी शिक्षण संस्थानों के दस्तावेज कब्जे में लेकर जांच की गई। जांच में एक शिक्षण संस्थान के माध्यम से संचालकों और बिचौलियों की ओर से 39.52 लाख रुपये की छात्रवृत्ति गबन का मामला उजागर हुआ।
बनबसा के पचपकरिया में देवभूमि विद्यापीठ नाम से खोले गए इस शिक्षण संस्थान में एससी व एसटी के 361 छात्रों को सिर्फ छात्रवृत्ति के लिए विभिन्न व्यवसायिक कोर्स में दाखिला दिला दिया गया था। छात्रवृत्ति हड़पने के बाद संस्थान बंद कर संचालक फरार हो लिए। मामला खुला तो पुलिस ने तत्कालीन सहायक समाज कल्याण अधिकारी गोपाल सिंह राणा, संस्थान संचालक चैरब जैन, अनिल गोयल, विवेक शर्मा, गौरव जैन और बिचोलिए मुकेश कुमार और प्रदीप के खिलाफ आईपीसी की धारा 409, 420, 466, 567, 468, 471 व 120 बी के तहत मुकदमा दर्ज कर आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास शुरू कर दिए।
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मामले में आरोपी शिक्षण संस्थान के संचालक ऋषिकेश निवासी चैरब जैन और हरिद्वार निवासी गौरव जैन ने हाईकोर्ट में सरेंडर कर मामले में पूर्ण सहयोग देने का आश्वासन देते हुए गिरफ्तारी पर रोक की गुहार लगाई। इस पर हाईकोर्ट ने फिलहाल गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए दोनों को विवेचना में सहयोग देने के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट के आदेश पर दोनों आरोपी शुक्रवार को मामले की विवेचना कर रहे कोतवाल धीरेंद्र कुमार के समक्ष पेश हुए। कोतवाल ने बताया कि दोनों आरोपियों से गहन पूछताछ कर उनके बयान दर्ज किए गए हैं।
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