स्वांला के ग्रामीण टीकाराम भट्ट द्वारा बनाया गया लकड़ी से निर्मित हाथी।
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चंपावत। नाम पंडित टीकाराम भट्ट, गांव स्वांला, उम्र 80 साल। गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले इस शख्स की एक खास खूबी है, और वह है उनके हाथ का हुनर। लकड़ी को आकार देना उनका शगल है। इस बुजुर्ग ने लकड़ी पर कारीगरी कर एक निहायत खूबसूरत हाथी बनाया है, जो दिखने में किसी जीवंत गजराज से कम नहीं है।
पंडित भट्ट बताते हैं कि गेठी की लकड़ी से साढ़े तीन दिन में हाथी को आकार दिया है। लकड़ी को घिसने से लेकर आकार देने में तीन दिन की मेहनत लगी, और फिर आधा दिन इसे जोड़ने में लगा। फेवीकॉल से जोड़ने के बाद लकड़ी के बुरादे से फिनिशिंग कर रंग भरे। इस पूरी कवायद में महज 165 रुपये का खर्च आया है। स्वांला का यह बुजुर्ग इससे पूर्व भी काष्ठकला के जरिए शेर, घुरड़, मोर आदि बना चुके हैं। इसके लिए उन्हें किसी तरह का सरकारी सहयोग नहीं मिला है।
पंडित टीकाराम बताते हैं कि 60 साल की उम्र तक उन्होंने भवन निर्माण का कार्य किया और बाद में खेती से मुनाफा नहीं होने से उन्होंने कृषि को छोड़ इस काष्ठकला में हाथ आजमाए। उनकी इन कलाकृतियों के खरीददार भी खूब मिल रहे हैं। उद्योग विभाग का कहना है कि काष्ठकलाकार को प्रोत्साहित करने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे।