पूर्णागिरि धाम (चंपावत)। नेपाल सीमा से लगे चंपावत जिले को मां पूर्णागिरि मेला उत्तराखंड से बाहर भी पहचान देता है। महज 12 दिन बाद 19 मार्च से शुरू हो होने वाले तीन माह के इस मेले की अभी कायदे से तैयारी शुरू नहीं हुई है। इसकी बड़ी वजह चुनाव आचार संहिता को बताया गया है। भैरव मंदिर से मुख्य मंदिर के बीच कई जगह पैदल रास्ते खस्ताहाल हैं। न बिजली लाइन बिछाने का काम शुरू हुआ है और न पेयजल स्टेंड पोस्ट में टोटी ही लगाई गई है। पार्किंग से लेकर रैनबसेरा की व्यवस्था भी अभी तक नहीं की गई है। और तैयारी का ये हाल तब है, जब अब तक के इतिहास में पहली बार 28 फरवरी को खुद मुख्यमंत्री ने मेले की तैयारियों की समीक्षा की है।
धार्मिक और कारोबारी नजरिए से मां पूर्णागिरि धाम चंपावत जिले का सबसे महत्वपूर्ण मेला है। मेलावधि में ही 20 लाख से अधिक तीर्थयात्रियों का शीश नवाना इस दरबार पर अटूट आस्था की निशानी है लेकिन मेले को लेकर इस बार कहीं खास तैयारी होते नहीं दिख रही है। श्रद्धालुओं को देवी दर्शन कराने वाला मार्ग कई जगह मुश्किलों भरा है। भैरव मंदिर से साढ़े तीन किमी पैदल मार्ग ही तीन से चार जगह टूटा है। मार्ग पर एक जगह टाइल लगाने का काम जरूर चल रहा है लेकिन अन्य स्थानों पर मरम्मत शुरू नहीं हुई है। भैरव मंदिर से 400 मीटर आगे सीढ़ीनुमा पैदल रास्ते का काफी बड़ा हिस्सा बरसात से टूटा होने से तीर्थयात्रियों के पांव ठिठक जाते हैं। इस जगह पर चौड़ाई कम होने से खतरा बढ़ रहा है। बिजली की लाइन बिछाए जाने का काम अभी शुरू ही नहीं हो सका है। 80 से अधिक स्टैंड पोस्टों में से ज्यादातर बंद है। आवासीय व्यवस्था के रूप में अस्थायी टिन शैड, साफ-सफाई, अस्थायी शौचालय, रैनबसेरा से लेकर कार पार्किंग स्थलों का काम भी अभी शुरू नहीं हुआ है। संवाद
आस्था: दोनों पांवों से दिव्यांग शर्मा ने डोली से किए देवी दर्शन
पूर्णागिरि धाम (चंपावत)। उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के दोनों पांवों से दिव्यांग शैलेंद्र शर्मा ने देवी मां के दर्शन किए। उन्होंने भैरव मंदिर से मुख्य मंदिर तक के साढ़े तीन किमी के पैदल मार्ग को पार करने के लिए डोली का सहारा लिया। दो मजदूरों की मदद से तय की गई इस दूरी के लिए 2200 रुपये का खर्च आए। शर्मा बताते हैं कि वे फिरोजाबाद से यूएस नगर आए, तो मां पूर्णागिरि धाम की जानकारी मिलने पर वे अकेले ही यहां दर्शन को आ गए। कहते हैं कि दर्शन के बाद उन्हें आध्यात्मिक शांति मिली है।
दिव्यांगों और बुजुर्गों को डोली से ले जाने की नौबत न आती अगर यहां जून 2015 में शिलान्यास हुए रोपवे का काम पूरा हो गया होता। पीपीपी मोड में 35 करोड़ रुपये से हनुमान चट्टी से काली मंदिर तक बनने वाले 903.225 मीटर लंबे रज्जुमार्ग का जून 2015 में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने शिलान्यास किया और इसके बाद 18 जुलाई 2017 को तब के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने रज्जुमार्ग की घोषणा की। केआर आनंद एंड केआरए इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट प्राइवेट कंपनी के साथ एमओयू भी हुआ लेकिन काम फिर भी शुरू नहीं हो सका है। 28 फरवरी को मेले की तैयारियों की समीक्षा करने पहुंचे टनकपुर पहुंचे सीएम पुष्कर सिंह धामी ने इस काम को आचार संहिता खत्म होने के बाद तेजी से कराने का दावा किया है।
तैयारी में जुटे व्यापारी
पूर्णागिरि धाम (चंपावत)। प्रशासन की ओर से तैयारियां भले ही सुस्त हो रही है लेकिन मेले से जुड़े व्यापारी और अन्य लोग तैयारियों में जुटे हैं। श्रद्धालुओं को निशुल्क रात्रि विश्राम की सुविधा देने के लिए व्यापारियों की तैयारी अंतिम चरण पर पहुंच गई है। मंदिर समिति के पूर्व अध्यक्ष पंडित भुवन चंद्र पांडे ने बताया कि मेला क्षेत्र के सभी व्यापारी वर्षों से निशुल्क विश्राम की व्यवस्था करते हैं। इसी तरह प्रसाद, पूजा सामग्री सहित जरूरी सामान का ढुलान भी तेजी से चल रहा है।
पहली बार लगेंगे दस जगह पर प्याऊ, कार पार्किंग क्षेत्र की क्षमता बढ़ेगी
पूर्णागिरि धाम (चंपावत)। मां पूर्णागिरि धाम में श्रद्धालुओं को पहली बार प्रशासन द्वारा शुरू की जाने वाली प्याऊ सुविधा मिलेगी। ककरालीगेट से ठुलीगाड़ तक दस जगह प्याऊ लगाए जाएंगे। इसके लिए प्रशासन की ओर से पेयजल स्टोर करने के लिए दस टंकियां भी खरीद ली गई हैं। इसी तरह भैरव मंदिर में टीआरसी के पास 300 से अधिक कारों की क्षमता वाला पार्किंग स्थल तैयार होगा।
51 शक्तिपीठों में एक है पूर्णागिरि धाम
साढ़े पांच हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित पूर्णागिरि देवी का धाम 51 शक्तिपीठों में से एक है। यहां देवी सती की नाभि गिरी थी। इस कारण मां पूर्णागिरि शक्तिपीठ को देवी सती की नाभि स्थली के रूप में भी माना जाता है। मनोकामना पूर्ति की कामना लिए मेले में लाखों श्रद्धालु देवी के दर्शन करते हैं।
पिछले दो मेले कोरोना की भेंट चढ़े। इस बार मेले के तीन माह तक चलने की उम्मीद है। मेले की तैयारियों को लेकर मंदिर समिति अपने स्तर से भी तैयारियों में लगा है। धाम में आस्था बनाए रखने के साथ श्रद्धालुओं को अधिक से अधिक सुविधाएं देने के लिए समिति सभी जरूरी कदम उठा रही है। - पंडित किशन तिवारी, अध्यक्ष, मां पूर्णागिरि मंदिर समिति।
मेले की व्यवस्थाओं के लिए निविदा की चुनाव आयोग से फरवरी में अनुमति मांगी गई थी। इजाजत नहीं मिलने पर निविदाएं नहीं कराई जा सकी है। इसके बावजूद मेले को लेकर अस्थाई बिजली व्यवस्था, रास्तों को ठीक कराना, पार्किंग सहित सभी जरूरी व्यवस्थाएं हर हाल में 17 मार्च तक करा ली जाएगी। - हिमांशु कफल्टिया, मेला मजिस्ट्रेट, मां पूर्णागिरि मेला।