चंपावत। भाकृअनुप-शीतजल मात्स्यिकी अनुसंधान निदेशालय और प्रायोगिक मत्स्य प्रक्षेत्र छीड़ापानी में देश के पहले स्टेट ऑफ द आर्ट रेनबो ट्राउट मछली रिसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (आरएएस) का निर्माण शुरू हो गया है। आरएएस की मदद से एक ही पानी को री-साइकिल कर रेनबो ट्राउट का उत्पादन किया जाएगा। इस सिस्टम के बनने से प्रतिदिन लाखों लीटर पानी की बचत होगी और मत्स्य पालन की लागत कम होने से पालकों को काफी मुनाफा होगा।
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत 3.64 करोड़ की लागत से आरएएस का निर्माण किया जा रहा है। आरएएस का निर्माण होने के बाद एक ही पानी को री-साइकिल कर रेनबो ट्राउट का उत्पादन किया जाएगा। इससे प्रतिदिन करीब सात लाख लीटर पानी की बचत से जल संवर्धन को भी बढ़ावा मिलेगा। आरएएस से रेनबो ट्राउट के सफल उत्पादन के बाद देश के अन्य हिस्सों में भी रेनबो ट्राउट मछली के उत्पादन की अलग-अलग आरएएस इकाई स्थापित की जाएंगी।
वृहद स्तर पर बनने वाले आरएएस में करीब डेढ़ करोड़ लागत की मशीन लगाकर पानी को री-साइकिल किया जाएगा। आरएएस में मछलियों के लिए ऑक्सीजन जेनरेटर का इस्तेमाल किया जाएगा। वृहद स्तर पर बनने वाले आरएएस में मत्स्य पालकों को प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। साथ में शोध कार्य भी किए जाएंगे। इसके बनने के बाद शोधार्थियों को नीली क्रांति के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए उत्पादन की तकनीक को विकसित करने में आसानी होगी। इससे पूर्व भीमताल में रेनबो ट्राउट के शोध के लिए छोटे स्तर (ट्रायल) पर आरएएस का निर्माण किया गया था और इसका सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया था। संवाद
वर्तमान प्रक्रिया में आठ लाख लीटर पानी होता है खर्च
चंपावत। वर्तमान में अनुसंधान केंद्र में पाली जा रही रेनबो ट्राउट मछलियों के लिए प्रतिदिन आठ लाख लीटर पानी की जरूरत होती है। केंद्र में करीब 10,000 किलो से अधिक मछलियां हैं। यहां छोटे स्तर पर रेनबो ट्राउट मछलियों का उत्पादन भी किया जा रहा है। आरएएस तकनीक के बाद एक लाख लीटर पानी को ही री-साइकिल कर मछली का उत्पादन कर लिया जाएगा और सात लाख लीटर पानी की बचत होगी। संवाद
सबसे समृद्ध ओमेगा-3 फैटी एसिड रेनबो ट्राउट में
चंपावत। रेनबो ट्राउट को रेडबैंड ट्राउट भी कहा जाता है। यह ठंडे पानी में रहने वाली खूबसूरत मछली है। रेनबो ट्राउट की विदेशों में बहुत मांग है। यह सेहत के लिए और स्वाद में अच्छी होती है। ट्राउट प्रोटीन का एक बड़ा स्रोत है। सभी मछलियों की तुलना में सबसे समृद्ध ओमेगा-3 फैटी एसिड रेनबो ट्राउट में होता है। यह मछली मूलरूप से ठंडे पानी में रहती है और इसे निरंतर बहते हुए पानी की जरूरत होती है। यह मछली गर्मी बर्दाश्त नहीं कर पाती है। संवाद
बीज बेचकर 80 लाख का राजस्व जुटाया
चंपावत। मत्स्य अनुसंधान केंद्र ने इस वर्ष देशभर में रेनबो ट्राउट के बीज बेचकर करीब 80 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त किया है। इस मछली का वजन 350 ग्राम से पांच किलो तक होता है। आधुनिक आरएएस बनने के बाद यहां से उच्च गुणवत्ता के रेनबो ट्राउट मछली का उत्पादन वृहद स्तर पर होगा। संवाद
कोट
छीड़ापानी में आरएएस का निर्माण शीतजल मात्स्यिकी क्रांति में एक बड़ी उपलब्धि होगी। इस निर्माण के पूरा होने के ठंडे पानी की रेनबो ट्राउट का उत्पादन एक ही पानी को री-साइकिल कर किया जाएगा। इस तकनीक की जानकारी मत्स्य पालकों को भी दी जाएगी। - डॉ. किशोर कुणाल, प्रभारी वैज्ञानिक, चंपावत।