बनबसा (चंपावत)। आखिरकार 21 वर्ष बाद उत्तराखंड एवं यूपी के बीच परिसंपत्तियों के बंटवारे पर सहमति बन गई है। दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने बृहस्पतिवार को हुई बैठक में कारगर कदम उठा उचित निर्णय लिया है जबकि राज्य गठन के समय दो दशक पूर्व केंद्र, यूपी एवं उत्तराखंड में अंतरिम सरकार भाजपा की ही थी लेकिन परिसंपत्तियों का बंटवारा नहीं हो पाया था। हालांकि दो वर्ष पूर्व यूपी सिंचाई विभाग ने अपने अधिकार वाली 25 प्रतिशत भूमि उत्तराखंड को देना तय किया था लेकिन बनबसा में कुछ तकनीकी कारणवश पहले से तय 25 फीसदी भूमि और भवन उत्तराखंड को देने से मना कर दिया गया। देखना है कि अब जल्द होने वाले सर्वेक्षण के बाद बनबसा में यूपी से उत्तराखंड को क्या मिलता है?
बनबसा में 2209.94 हेक्टेयर भूमि पर यूपी सिंचाई विभाग का ही अधिकार है। इसमें से चंपावत जिले में शारदा बैराज एवं आवासीय, कार्यालय परिसर में 93.83 हेक्टेयर, नहर में 521.21 हेक्टेयर भूमि ली गई है। करीब 909.75 हेक्टेयर भूूमि पर वन, बगीचे और अवैध कब्जे हैं। यूएस नगर जिले में करीब 685.15 हेक्टेयर भूमि से नहर निकाली गई है। बनबसा में करीब 57 एकड़ भूमि पर अवैध कब्जे हैं। बताया गया है कि पहले यूपी सिंचाई विभाग ने 25 प्रतिशत भूमि उत्तराखंड को देना तय किया था। बाद में दोबारा किए गए सर्वे में विशेषज्ञों ने इस प्रस्ताव को गलत निर्णय बता बनबसा में काफी कम जमीन हस्तांतरित करने का निर्णय लिया था।
कहा गया कि बनबसा में प्रस्तावित नए बैराज के लिए और अधिक भूमि की जरूरत होगी। पहले नेपाल के जिमुआ से लगी वन भूमि, पंपापुर, बनबसा में अतिक्रमण वाली भूमि, बागान एवं प्राथमिक विद्यालय की भूमि के अलावा कुछ भवन देना तय था लेकिन बाद में प्राथमिक विद्यालय, पंपापुर, बनबसा में अक्रिमण वाली जमीन ही उत्तराखंड को देने की बात कही गई थी।
यह सर्वे यूपी सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने किया था जिसमें उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व नहीं था। सिंचाई विभाग के एसडीओ प्रशांत वर्मा ने बताया कि बनबसा में प्रस्तावित नए बैराज निर्माण को लेकर कुछ अतिरिक्त भूमि की जरूरत पड़ेगी एवं बैराज के अपस्ट्रीम में बंधे के रखरखाव के चलते नेपाल के जिमुआ से लगी भूमि देने भी मना किया गया है लेकिन अब जल्द ही दोनों राज्यों की संयुक्त समिति के सर्वेक्षण के बाद ही उत्तराखंड को मिलने वाला भूभाग तय होना है।
बनबसा बैराज से होती है 22 लाख एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई
बनबसा (चंपावत)। अंग्रेजों ने बनबसा से यूपी के रायबरेली तक करीब 22 लाख एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई के लिए बनबसा बैराज को बनवाया था। इस समय भी इस बैराज का महत्व सिंचाई की दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। बनबसा बैराज से निकली शारदा नहर के पानी से ही लोहियाहेड पावर हाउस का भी संचालन किया जाता है।