चंपावत। जल जीवन मिशन जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम के संचालन में प्रधानों के असहयोग के चलते इस कार्य में लगे विभागों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस कार्यक्रम का लक्ष्य 2022 तक प्रत्येक परिवार को पानी पहुंचाना है, लेकिन शासन के ताजा आदेश के तहत दिसंबर तक हर गांव में पेयजल सुविधा उपलब्ध कराना है।
जिले के 656 राजस्व गांवों में 272 गांवों का सर्वेक्षण जल निगम और शेष का जल संस्थान की ओर से किया जा रहा है। जल निगम ने 47 और जल संस्थान ने 40 स्टीमेट ही तैयार किए हैं। सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है कि गांव ऊंचाई पर बसे हैं, जबकि पेयजल स्रोत काफी नीचे हैं। कई गांवों में ग्रेविटी से पानी पहुंचाना संभव नहीं है। इसके लिए सोलर पावर प्लांट का सहारा लिया जाएगा। एक गांव की योजना के लिए दो स्टीमेट बनवाए जा रहे हैं। एक में पेयजल कनेक्शन देने का और दूसरे में अन्य सभी कार्यों को किया जाना है। जल निगम में स्टाफ की भारी कमी इस कार्य में बाधक बन रही है। विभाग में आठ में से केवल तीन अपर सहायक अभियंता ही कार्य कर रहे हैं, जबकि एक को संगणक का कार्य सौंपा गया है। सर्वेक्षण कार्य में अपर सहायक अभियंता की महत्वपूर्ण भूमिका है।
पंचायतों के माध्यम से कराएं मिशन के कार्य
चंपावत। वरिष्ठ ग्राम प्रधान चांद बोहरा का कहना है कि जल जीवन मिशन के कार्यों को ग्राम पंचायतों के माध्यम से संपादित कराने के लिए उनका संगठन प्रांतीय स्तर पर संघर्ष कर रहा है। यह मांग पूरी होने तक ग्राम प्रधान इस कार्य में कोई रुचि नहीं लेंगे। संवाद