किसानों की आमदनी को 2022 तक दोगुना करने के लिए हर विकासखंड में पृथक जलवायु क्षेत्र व समूहों का चयन किया जाएगा। कृषि, उद्यान, पशुपालन, डेयरी व सहकारिता विभाग की बैठक में सीडीओ एसएस बिष्ट ने कहा कि जलवायु क्षेत्रों का निर्धारण 1000 मीटर, 1500 मीटर व 2400 मीटर तक की श्रेणी में करना है। इन ऊंचाई वाले समूहों का चयन कर गांवों को चिन्हित किया जाएगा, ताकि ऐसे गांवों की मिट्टी का परीक्षण किया जा सके। किसानों की आय में बढ़ोत्तरी के लिए अधिकारियों को चयनित गांवों में जाकर पांच वर्षों का डाटा बेस तैयार करने के निर्देश दिए गए।
इस मौके पर चयनित गांवों में बोई जा रही फसल और उससे होने वाली आय का आकलन करने के साथ ही काश्तकारों को विभागीय सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा फसल की गुणवत्ता में सुधार के लिए कदम उठाने में मदद करने को कहा गया। चयनित समूहों एवं गांवों में किसानों को बर्मी कंपोस्ट, खेतों में निराई-गुड़ाई, सिंचाई व बीजों के संबंध में जानकारी देने के साथ वैज्ञानिक ढंग से खेती करने को प्रेरित करने को कहा गया।
सहकारिता के सभी केंद्रों को विक्रय केंद्रों में भी तब्दील करने, काश्तकार का डाटा बेस तैयार करने, उत्पादित फसल को गांव में ही क्रय करने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए। सीएओ एस कुमार ने बताया कि फागपुर, चंदनी, खर्ककार्की, बमनजौल, काकड़, बाराकोट, बापरू, चौड़ी रायनगर, धौनसीलिंग, सुंई, गोसनी, चल्थिया व सुनडुंगरा को समूह (कलस्टर) के रूप में चयनित किया गया है। दुग्ध विकास, पशुपालन, उद्यान, मत्स्य, सहकारिता विभाग के साथ उद्योग विभाग को भी कार्ययोजना देने को कहा गया। सुंई कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिकों को भी चयनित कलस्टरों में उगाई जा सकने वाली फसलों के संबंध में क्षेत्र भ्रमण कर जानकारी उपलब्ध कराने को कहा। बैठक में पीडी एचजी भट्ट, डीडीओ आरसी तिवारी, एआर पीएस राणा, सीवीओ बीएस जंगपांगी, डीएसटीओ एनबी बचखेती, उद्योग विभाग के जीएम जीवी जोशी, डीएचओ एनसी आर्य, बीडीओ बीएस खाती, भूमि संरक्षण अधिकारी राजन उप्रेती आदि मौजूद थे।