जिले के पर्वतीय क्षेत्र में मंगलवार से आधार कार्ड नहीं बन पा रहे हैं। दूरदराज से आए काफी लोग आधार कार्ड बनाने आए, लेकिन मायूस लौटे। आधार केंद्र के संचालक ने अभद्रता का आरोप लगाते हुए इसके संचालन में असमर्थता जताई है। इसे लेकर केंद्र के संचालक ने बुधवार को डीएम को पत्र भी भेजा है।
भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने करीब तीन माह पूर्व आधार कार्ड बनाए जाने का कार्य अनिवार्य रूप से सरकारी कार्यालय परिसर में करने के आदेश जारी किए थे। इस आदेश के बाद जिले में आधार कार्ड बनाने के चंपावत व बनबसा के ही केंद्र बच गए थे। चंपावत जिला पंचायत परिसर में स्थित इस केंद्र में अनेकों बार संचालक के साथ अभद्रता होती रही। कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) के जिला समन्वयक कुलदीप भंडारी का कहना है कि अभद्रता की शिकायत प्रशासन से पिछले माह से अब तक तीन बार की जा चुकी है, लेकिन पुलिस ने मदद नहीं की। और तो और जिला मजिस्ट्रेट ने कोतवाली पुलिस को 15 नवंबर को आधार कार्ड बनाने के केंद्र में दो पुलिस कर्मी तैनात करने के निर्देश दिए थे, लेकिन इस निर्देश को भी पुलिस ने हवा में उड़ा दिया। बुधवार को उन्होंने डीएम को भी पत्र भेजा है।
कहा कि मंगलवार को ग्यालीसेरान के एक व्यक्ति द्वारा आधार कार्ड बनाने के लिए दबाव डालने के साथ दी गई धमकी के बाद आधार केंद्र संचालक ने काम करने में असमर्थता जताते हुए इसे बंद कर दिया है। इस केंद्र के बंद होने से चंपावत जिले के पर्वतीय हिस्से में एक भी आधार केंद्र नहीं रह गए हैं। अब लोग जिले के अलग-अलग हिस्सों से 75 से 112 किलोमीटर दूर बनबसा बीएड कॉलेज में स्थित आधार केंद्र में जाने को मजबूर हैं। इधर एसडीएम सीमा विश्वकर्मा का कहना है कि आधार कार्ड केंद्र को नए स्थान में शुरू करवाने के लिए तेजी से प्रयास किए जा रहे हैं।
नहीं बन सका बेटी का आधार कार्ड
चंपावत आरामशीन क्षेत्र की निर्मला देवी अपनी बेटी रिया का आधार कार्ड बनाने के लिए तीन बार पहले भी आ चुकी हैं। लेकिन आधार नहीं बन सका। और बुधवार को केंद्र के बंद होने से मायूस लौटी।
नाम बदलने 93 किमी दूर से आए विष्णु जोशी
यहां से करीब 93 किलोमीटर दूर चल्थ्यिा गांव से आए विष्णु दत्त जोशी (65) को आधार केंद्र में लटका ताला देख मायूस हो गए। उन्होंने बताया कि वह आधार कार्ड में दर्ज गलत नाम को सही कराने आए थे।
लटके ताले ने मायूस किया
चंपावत से 75 किमी दूर रीठा साहिब के प्रेम गिरि ने आधार बनाने के लिए सात दिसंबर को पंजीकरण कराया। उन्हें 20 दिसंबर की तारीख दी गई थी, मगर लटके ताले ने प्रेम को मायूस किया।
ममता ने 6 को पंजीकरण कराया था
28 किमी दूर दियूरी गांव की ममता देवी अपनी नन्हीं बेटी के साथ 6 दिसंबर को आधार के लिए पंजीकरण कराया था। 20 दिसंबर का नंबर लगा था, लेकिन आधार कार्ड बन नहीं सका।
आधार के बगैर स्कूल से नाम कटने का खतरा
खेतीखान गंभीरगांव निवासी को अपने तीन बच्चों नवीन, बबीता व पूजा का आधार कार्ड बनवाना था। उनका कहना है कि आधार नहीं बनने से स्कूल से नाम काटने की चेतावनी दी जा रही है। केंद्र बंद होने से अब वे बनबसा जाने को मजबूर है।
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