चंपावत। अंग्रेजों के जमाने की छतकोट- बड़ोली- बनलेख सड़क एनएच का एक बेहतर दूसरा विकल्प हो सकता है। इस सड़क के बनने से क्षेत्र के कई गांवों को लाभ मिलेगा और चंपावत जिले की दूरी भी कम हो जाएगी। क्षेत्रीय लोगों ने जिला प्रशासन से इस मार्ग का सर्वे कर सड़क बनाने की मांग की है।
अंग्रेजों के जमाने में बनलेख से छतकोट होते हुए टनकपुर जाने वाला पैदल मार्ग आज भी लोगों को आवाजाही में काफी मददगार रहा है। यह मार्ग एनएच के बंद होने पर एक बेहतर विकल्प हो सकता है। ग्रामीण इसे बनाने की मांग कर रहे हैं। बीते दस दिनों से चंपावत-टनकपुर एनएच पर डेंजर जोन स्वाला के पास सड़क मार्ग यातायात के लिए मुसीबत बना हुआ है। डेंजर जोन के कारण स्वाला में 10 घंटे भी बमुश्किल आवाजाही हो रही है। छतकोट-बड़ोली-बनलेख सड़क बनने से चंपावत की दूरी भी आठ किमी कम हो जाएगी। सड़क का छतकोट से बड़ोली होते हुए ज्वारलेख, ओलना मौराड़ी, चंतोला में मिलान किया जाए तो यह एक बेहतर विकल्प हो सकता है।
छतकोट-बड़ोली-बनलेख मार्ग के बनने से क्षेत्र की बड़ी आबादी को लाभ मिलेगा। साथ ही एनएच बंद होने पर यह यातायात का एक विकल्प रहेगा। वाहनों की आवाजाही बंद नहीं होगी। इस मार्ग पर बारिश के दौरान मलबा आने का खतरा भी काफी कम है।
रमेश थ्वाल, ग्रामीण
अंग्रेजों ने इस मार्ग को अश्व मार्ग के रूप में काफी प्रयोग किया था। साथ ही आज भी यह मार्ग पैदल आवाजाही के लिए सुरक्षित है। इस मार्ग को सड़क के रूप में बनाया जाता है तो यह बड़ी राहत देगा।
रीता थ्वाल, ग्राम प्रधान, बड़ोली।