वर्षों से लटके ब्लड बैंक के शुरू होने की राह प्रशस्त हो गई है। जरूरी पदों का सृजन नहीं होने से ये दुश्वारी आ रही थी। पर अब लैब तकनीशियन के पदों को भरने के आदेश हो गए हैं। पदों को भरने की प्रक्रिया के साथ अन्य औपचारिकताओं को एक माह में पूरा करने की बात कही जा रही है।
जिला अस्पताल में ब्लड बैंक भवन का निर्माण करीब 22 लाख रुपये से चार वर्ष पूर्व किया गया था, लेकिन यह ब्लड बैंक जरूरतमंदों को खून देने की स्थिति में कभी रहा नहीं है। इसके संचालित नहीं होने की वजहें उपकरणों और पदों के न भर पाने की थी। पर अब ये दोनों अड़चनें दूर हो रही है। उपकरणों के लिए 36 लाख रुपये रिलीज हो चुके हैं। और अब लैब तकनीशियन की तैनाती की कवायद भी शुरू हो गई है।
राज्य एड्स नियंत्रण समिति के सहायक परियोजना निदेशक डॉ.विनोद टोलिया का कहना है कि निदेशालय के स्तर से ब्लड बैंक के लिए दो लैब तकनीशियन रखने की अनुमति दी जा चुकी है। इन तकनीशियनों को आउटसोर्स से रखने की प्रक्रिया जिला स्तर पर होनी है। वैसे जिला अस्पताल में इस वक्त पैथोलोजिस्ट सहित अन्य पदों की तैनाती है। जिन्हें यहीं से ब्लड बैंक ट्रांसफर किया जाएगा।
हरी झंडी मिलने के बाद ब्लड बैंक के लिए लैब तकनीशियनों की आउटसोसंग से नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की जाएगी। निदेशालय से प्राप्त 36 लाख रुपए का उपयोग ब्लड बैंक के लिए रेफरिजरेटर, डोनर बैड, एलाइजर रीडर, रिएजेंट, किट, हीमोग्लोबिन मीटर, ब्लड बैंक भवन में एयर कंडीशनड, इंटरनेट के साथ कंप्यूटर प्रिंटर आदि के लिए किया जाएगा। तकनीशियानों की तैनाती और उपकरणों की खरीद के बाद भारत सरकार की टीम मुआयना कर ब्लड बैंक का लाइसेंस जारी करेगी।
डा.आरके जोशी, मुख्य चिकित्साधीक्षक, जिला अस्पताल, चंपावत।