सातवें वेतन आयोग की रिपोर्ट अभी लागू नहीं हुई है, मगर डिप्लोमा फार्मेसिस्टों ने आयोग की कई सिफारिशों के खिलाफ तीखे तेवर दिखाना शुरू कर दिया है। शुक्रवार को जिला अस्पताल परिसर में डिप्लोमा फार्मेसिस्ट एसोसिएशन की जिलाध्यक्ष सुरेश जोशी की अध्यक्षता और उपाध्यक्ष शेखर सिंह सार्की के संचालन में बैठक हुई, जिसमें इन सिफारिशों का दिल्ली में 28 दिसंबर को विरोध करने का एलान किया गया। विरोध को ये फार्मेसिस्ट 27 दिसंबर को यहां से बड़ी संख्या में रवाना होंगे।
कहा गया कि रिक्रूटमेंट रूल्स (आरआर) को नजरंदाज कर फार्मेसिस्टों को भारी आर्थिक नुकसान होगा। अब तक इंटर पास करने के बाद दो वर्ष के फार्मेसी के डिप्लोमा के बाद फार्मेसिस्ट बनने की राह खुलती थी, मगर अब इसमें दो वर्ष के अनुभव अथवा चार साल की बी फार्मा की डिग्री को जोड़ दिया गया है, मगर वेतनमान का निर्धारण पुरानी पात्रता के आधार पर किया जा रहा है। इसके अलावा संगठन ने चंपावत जिले के फार्मेसिस्टों की ड्यूटी कुंभ, मानसरोवर यात्रा सहित जिले के बाहर के मेलों में नहीं लगाने की मांग की है।
कहा कि जिले में मां पूर्णागिरि मेला, देवीधुरा, आपदा ड्यूटी और स्थानीय स्तर के मेलों की जिम्मेदारी फार्मेसिस्ट निभा रहे हैं। बैठक में एसोसिएशन के संगठन मंत्री कुलदीप राय, कोषाध्यक्ष विष्णु गिरि गोस्वामी, चीफ फार्मेसिस्ट जेसी कांडपाल, तान सिंह, मनोज पुनेठा, जितेंद्र वर्मा, एमसी जोशी, लक्ष्मण गिरि, प्रेमराम टम्टा, मृत्युंजय वर्मा, अनिल वर्मा, प्रमोद कुमार पांडेय, रोशन लाल विश्वकर्मा आदि ने विचार रखे।