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वन आरक्षियों की भर्ती की निष्पक्षता पर उठे सवाल

Tue, 03 Nov 2015 10:32 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लोहाघाट
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जिले में वन आरक्षियों की भर्ती की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो गए हैं। हालांकि, अब तक परीक्षा परिणाम घोषित नहीं हुए हैं, लेकिन लोहाघाट के सार्वजनिक स्थानों पर ऐसे पर्चे चिपकाए गए हैं, जिसमें लिखा गया है कि डीएफओ ने 12 से 15 लाख रुपये लेकर लोगों का चयन निश्चित कर दिया है।
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पर्चे में हिमालय सिंह टोलिया रेंजर भिंगराड़ा के भतीजे और एक रिश्तेदार, चंपावत के रेंजर बृजमोहन टम्टा के भतीजे तथा ग्राम विकास अधिकारी अशोक सिंह अधिकारी के भतीजे का चयन निश्चित माना गया है। हालांकि, इस मुद्दे को लेकर लोहाघाट में छात्रों ने प्रदर्शन भी किया था। पर्चे में मांग की गई है कि भर्ती प्रक्रिया को निरस्त कर डीएफओ को यहां से हटाने के बाद नए सिरे से प्रक्रिया शुरू की जाए। ऐसा न करने पर सरकार के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी भी दी गई है।

रिजल्ट जारी होने से पूर्व संदेह ठीक नहीं
डीएफओ एके गुप्ता ने कहा कि अभी रिजल्ट जारी नहीं हुआ है। ऐसे में संदेह करना ठीक नहीं है। उन्हें परिणामों की स्वयं कोई जानकारी नहीं है। परिणाम एक-दो दिन में निकल जाएंगे।
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पुख्ता प्रमाण मिले तो कार्रवाई निश्चित होगी
कुमाऊं के वन संरक्षक प्रेम कुमार की जानकारी में यह बात लाए जाने पर उनका कहना है कि भर्ती प्रक्रिया निश्चित तौर पर पारदर्शी वातावरण में होनी चाहिए। यदि आरोपी कोई पुख्ता प्रमाण उन्हें उपलब्ध कराएंगे तो उस पर निश्चित कार्रवाई की जाएगी।

पांच सदस्यीय समिति में चार विभागीय अधिकारी
वन आरक्षियों की भर्ती के लिए गठित पांच सदस्यीय समिति में वन विभाग के चार अधिकारी शामिल हैं, जिसमें डीएफओ एके गुप्ता को अध्यक्ष, लोहाघाट के एसीएफ एमएस सिरोही, पिथौरागढ़ वन प्रभाग के एसीएफ मनोहर सिंह सैनियां, चंपावत के पशु चिकित्साधिकारी डा.जेपी यादव तथा देवीधुरा के रेंजर जेसी दानी को शामिल किया गया है।
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