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12 हजार घंटे के अथक तप से कम किया हुड्डी नदी का प्रकोप

Mon, 28 Jan 2019 11:54 PM IST
बृजमोहन बृजमोहन विनोद काला बनबसा (चंपावत)।
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बनबसा के बूचड़ी नाले से हो रहे भूकटाव को रोकने को कृषक द्वारा बनाया क्रेट्स। - फोटो : अमर उजाला
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चंदनी निवासी युवा किसान केशर सिंह माउंटेन मैन दशरथ मांझी की याद दिला रहे हैं। केशर सिंह ने तट को नुकसान पहुंचा रही हुड्डी नदी की धारा को आठ साल की अथक मेहनत से काबू किया। इन आठ सालों में केशर सिंह नदी के तट पर वायर क्रे ट्स की शक्ल में पत्थरों को इकठ्ठा करते रहे। इससे अब इस क्षेत्र में बाढ़ का खतरा कम हुआ है।

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हुड्डी नदी बरसात में बनबसा के लिए बाढ़ का पर्याय बनी हुई है। कलौनिया, टनकपुर और सेना छावनी के बूचड़ी नाले से बहकर आने वाला बरसाती पानी हुड्डी नदी में पहुंचकर बाढ़ का सबब बनता है। लंबे समय से हुड्डी नदी की धारा बरसात में चंदनी, आनंदपुर और बमनपुरी के ग्रामीण तटों को काट रही है। चंदनी निवासी कृषक केशर सिंह ने हुड्डी नदी के अंदर और बाहर पड़े बड़े पत्थरों (बोल्डरों) को उठाकर नदी किनारे क्रेट्स की शक्ल में जमा किया। इससे बूचड़ी नाले के समीप हुड्डी नदी ने अपना बहाव मार्ग बदल दिया। इससे भूकटाव को रोकने में काफी मदद मिली है। इस काम को अंजाम देने में युवा किसान को करीब आठ साल लगे।

केशर सिंह के मुताबिक प्रतिदिन सुबह ढाई से तीन घंटे और शाम को दो घंटे वे नदी में पहुंचकर नदी के बीच के पत्थरों को किनारे पर एकत्र करने का कार्य कर रहे हैं। बूचड़ी नाले के निकट हुड्डी नदी के पानी के अंदर और किनारे बड़े पत्थरों को वे किनारे पर जमा कर देते हैं। बड़े पत्थर उठाए जाने से नदी गहरी होकर अपने पूर्व मार्ग पर बहने लगी। इससे नदी के तट पर होने वाले भूकटाव का खतरा खासा कम हो गया है।  
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ग्रामीण बोले सराहनीय हैं केशर सिंह प्रयास
बनबसा (चंपावत)। चंदनी की पूर्व प्रधान निर्मला मौनी ने केशर सिंह के प्रयासों को सराहनीय बताया। गौरव सेनानी कल्याण समिति अध्यक्ष कै. भानी चंद ने केशर के प्रयास को भूकटाव रोकने वाला बताया।  अन्य ग्रामीण युवाओं को उनसे सीख लेने की सलाह दी है। ग्रामीण अर्जुन सिंह ने प्रशासन से उन्हें प्रोत्साहित करने की मांग की है।

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